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पारित हो गया था। हमें देखना यह है कि हमारा संविधान उन मूल संकल्प-उस उद्देश्य संकल्प पर आधारित हो जिसमें न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के दावे मंजूर कर लिए गए हैं। मेरा निवेदन है कि प्रारुप संविधान उद्देश्य संकल्प का सही प्रतिबिम्ब है। अतः हम यह कह सकते हैं कि इसमें हमारे उद्देश्य पूरे हो गए हैं।
एक अन्य कसौटी से भी परखना होगा कि प्रारुप संविधान हमारे देश और हमारे राष्ट्र के प्रयोजनों का जवाब है। वह कसौटी यह है कि क्या हमारी स्वतंत्रता, हमारी स्वाधीनता और लोकतांत्रिक पंथनिरपेक्ष शासन को कायम रख पाएगा। मेरी राय है कि उस दृष्टिकोण से भी, वह प्रारुप संविधान हमारा प्रयोजन पूरा करता है..।
श्रीमन्, हमारा संविधान एक ऐसा संविधान है जो विश्व भर के सभ्य देशों में प्रचलित विभिन्न संविधानों की तुलना पर आधारित है। समस्त संविधानों की विभिन्न अच्छी बातें अंगीकार करके उनमें अपने देश के हित में आवश्यक फेरबदल किए हैं। यदि हम ईमानदारी और सच्चाई से संविधान का विश्लेषण करें तो मुझे पक्का भरोसा है कि हमारा देश सम्पन्न होगा, खुशहाल होगा, मजबूत होगा और हम अपनी स्वाधीनता कायम रख सकेंगे और स्वाधीनता कायम ही नहीं रख सकेंगे बल्कि अपने दिवंगत नेता राष्ट्रपिता के महान लक्ष्य को पूरा कर पाएंगे। उन्होंने कहा था कि अब भारत ऐसी स्थिति में हो जाएगा कि वह अन्य पराधीन देशों को आजाद करा सके और पूरे विश्व में शांति एवं समृद्धि ला सके।
श्रीमन्, इन शब्दों के साथ, मेरा निवेदन है कि डॉ. अम्बेडकर द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को सदन द्वारा स्वीकार कर लिया जाए।
ख्1, पं. बालकृष्ण शर्मा (संयुक्त प्रांत-साधारण)ः उपसभापति महोदय, अनेक मित्र आए और उन्होंने माननीय विधि मंत्री को जो इस प्रारुप संविधान के प्रभारी थे, अपनी-अपनी बधाई दी। यदि मैं भी वहीं भावनाएं दोहराऊँ तो यह प्रायः पुनरुवित दिखाई पड़ेगी। परंतु मैं भी यह अपना कर्तव्य समझता हूँ। मैं विद्वान विधि मंत्री को उस अत्यंत स्पष्ट शैली के लिए बधाई दूं जिससे उन्होंने हमारे विचारार्थ यह प्रारुप संविधान प्रस्तुत किया है।
यहाँ अनेक मित्र और आलोचक उपस्थित हैं उन्होंने हमारे संविधान के विरुद्ध कुछ आरोप लगाए हैं। कई मित्रों द्वारा लगाया गया एक आरोप यह है कि हमारा संविधान बहुत भारी है। स्वयं प्रस्तुतकर्ता ने उस दस्तावेज के भारी होने का उल्लेख किया था। जब हम विभिन्न अन्य संविधानों के खंडों और अनुच्छेदों पर विचार करते हैं तो हम पाते हैं कि हमारा संविधान वास्तव में भारी है। श्रीमन्, जैसा कि आप जानते है, इसमें 315 अनुच्छेद हैं जबकि ब्रिटिश उत्तरी अमेरिका अर्थात् कनाडा के संविधान में केवल
1 . संविधान सभा वाद-विवाद, शासकीय रिपोर्ट, 7, 6 नवंबर, 1948, पृष्ठ 272-273 ।