86 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रश्न का कोई उत्तर दे पायेंगे। लेकिन जहाँ तक वर्तमान संविधान की बात है, अनुसूचित क्षेत्र या जनजातीय क्षेत्र से बाहर जाने वाला किसी अनुसूचित जनजाति का कोई सदस्य अपने साथ उन विशेषाधिकारों और विशेष रियायतों को ले जाने का अधिकारी नहीं होगा जिनका वह तब अधिकारी है जब वह अनुसूचित क्षेत्र या जनजातीय क्षेत्र में रह रहा है। जहाँ तक मैं देख सकता हूँ जनजातीय क्षेत्रों या अनुसूचित क्षेत्रों में लागू होने वाले प्रावधानों को अन्य क्षेत्रों, सिवाय उनके जो इनमें सम्मिलित हैं में व्यावहारिक रूप से लागू करना असम्भव होगा। महोदय, मैं आशा करता हूँ कि मैंने उन सब बातों का उत्तर दे दिया है जो विभिन्न वक्ताओं द्वारा उस समय उठायी गयी थीं जब वे इस धारा में संशोधन पर बोले थे, और मुझे विश्वास है कि मेरे स्पष्टीकरण से वे संतुष्ट हो जाएंगे कि उनकी सभी बातों का जवाब दिया जा चुका है। मैं आशा करता हूँ कि अनुच्छेद, जैसा संशाधित किया गया है, सदन द्वारा स्वीकार कर लिया जायेगा।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं अब उन संशोधनों को एक-एक करके मतदान के लिए रखूँगा जो प्रस्तावित किए गए हैं और जिनकी संख्या 30 है।
¹अधोलिखित संशोधन डॉ. अम्बेडकर द्वारा स्वीकार किए गए और सदन द्वारा अपना लिये गये। शेष 28 संशोधन अस्वीकृत हुए।ह्
( i ) फ्कि अनुच्छेद 13 की धारा (1) में, शब्दों फ्इस अनुच्छेद के अन्य प्रावधानों
के अधीनय् को निकाला जाए।य्
( ii ) फ्कि अनुच्छेद 13 की धारा (2) के लिए अधोलिखित को प्रतिस्थापित किया
जाए।य्
फ्(2) इस अनुच्छेद की धारा (1) की उपधारा (क) का कोई उपबंध किसी प्रचलित कानून के अमल को जहाँ तक यह इससे संबंधित है, प्रभावित नहीं करेगी अथवा राज्य को अभियोग पत्र, झूठी निन्दा, बदनामी या किसी ऐसे मामले के संबंध में जिससे नैतिकता और शालीनता का उल्लंघन होता है या जो राज्य की सुरक्षा को गुप्त रूप से नष्ट करता है या जो राज्य का तख्ता पलटने की कोशिश करता है, कोई कानून बनाने से नहीं रोकेगी।य्
( iii ) फ्कि संशोधनों की सूची के संशोधन नं. 454 के संदर्भ में -
( i ) अनुच्छेद 13 की धारा (3), (4), (5) और (6) में, शब्दों फ्किसी
प्रचलित कानूनय् के बाद शब्द फ्जहाँ तक यह लागू करता हैय् अंतर्विष्ट
किए जाएं_ और
( ii ) अनुच्छेद 13 की धारा (6) में, शब्द ‘विशेषकर’ के बाद शब्द ‘उक्त
धारा की कोई बात किसी प्रचलित कानून के अमल को जहाँ तक यह
निर्धारित करती है या किसी प्राधिकारी को निर्धारित करने की शक्ति
देती है प्रभावित नहीं करेगी अथवा राज्य को कोई कानून बनाने से नहीं
रोकेगीय् सन्निविष्ट किए जाएं।