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को प्रभावी बनाने के लिए कि व्यापार और वाणिज्य सम्पूर्ण भारत में स्वतंत्र होना चाहिए जो एकमात्र तरीका हमें मिला वह व्यापार और वाणिज्य को मूलाधिकारों के तहत लाने का था। इसी कारण को, चाहे यह बात बेढ़ंगी लगे, हमने सोचा कि व्यापार और वाणिज्य को मूलाधिकारों के तहत लाने के अलावा हमारे पास अन्य कोई रास्ता नहीं है। मेरे विचार से अब मेरे मित्र श्रीमान् सुब्रह्मण्यम की सूची में यह स्थान क्यों दिया यद्यपि, सैद्धांतिक रूप से, मैं मानता हूँ कि यह विषय मूलाधिकारों की विषय-वस्तु के सुसंगत नहीं है।
दूसरे तर्क के संबंध में, कि जब व्यापार और वाणिज्य अनुच्छेद 244 के अधीन कर दिये गये हैं, हमने वास्तव में मूलाधिकार को नष्ट कर दिया है, मेरे विचार से, मैं निष्पक्ष रूप से कह सकता हूँ कि मेरे मित्र श्रीमान् सुब्रह्मण्यम ने या तो अनुच्छेद 244 पढ़ा नहीं है या फिर उसे गलत पढ़ा है। अनुच्छेद 244 का कार्यक्षेत्र बहुत सीमित है। यह केवल इतना करता है कि प्रांतीय विधायिकाओं को अन्तर्राज्जीय वाणिज्य और व्यापार के संबंध में शक्तियां देता है, एक दूसरे राज्य से वाहित या निर्मित वस्तुओं के प्रवेश पर निश्चित पाबन्दियां लगाता है, बशर्ते कि विधि-निर्माण इस प्रकार का है कि यह राज्य के भीतर निर्मित वस्तुओं और राज्य के बाहर से आयातित वस्तुओं में कोई असमानता या भेदभाव नहीं थोपता। अब मुझे विश्वास है कि वह सहमत होंगे कि यह बहुत ही सीमित कानून है। यह निश्चय ही व्यापार और वाणिज्य का और सम्पूर्ण भारत में परस्पर व्यवहार का अधिकार जिसको स्वतंत्रता की आवश्यकता है, नहीं छीनता है।
श्री सी. सुब्रह्मण्यम ः धारा कहती है कि किसी राज्य के लिए व्यापार, वाणिज्य या परस्पर व्यवहार की स्वतंत्रता पर कानून द्वारा ऐसी उचित पाबंदिया लगाना जो सार्वजनिक हितों में हो सकती हैं कानून सम्मत होगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः हाँ, लेकिन उचित पाबंदियों का यह अर्थ नहीं है कि पाबंदियां व्यापार की स्वतंत्रता और समानता को पूर्णतया नष्ट करने वाली हों। इसका यह बिल्कुल भी अर्थ नहीं है। महोदय, इसलिए मैं कहता हूँ कि अनुच्छेद अपने वर्तमान रूप में पूर्णतया उचित है और मैं इसे सदन में प्रस्तुत करता हूँ।
अनुच्छेद 16 स्वीकृत हुआ और संविधान में जोड़ दिया गया।
अनुच्छेद 17
ख्ऽ, श्रीमान् उपाध्यक्ष ः अब हम अनुच्छेद 17 पर आते हैं।
सदन के समक्ष प्रस्ताव यह है कि अनच्छेद 17 संविधान का हिस्सा बन गया है।
इस अनुच्छेद के प्रति कई संशोधन हैं जिन पर अब हम विचार करेंगे। मेरी सूची में पहला संशोधन 543 है। यह नकारात्मक है, इसलिए यह निकाला जाता है।
ऽ सी.ए.डी., अंक VII, 3 दिसम्बर, 1948, पृ. 803