94 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अनुच्छेद 18
ख्ऽ, माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं श्रीमान् दामोदर स्वरूप सेठ द्वारा प्रस्तावित संशोधन नं. 564 को स्वीकार नहीं करता।
संशोधन अस्वीकृत हुआ।
अनुच्छेद 16 स्वीकृत हुआ और संविधान में जोड़ दिया गया।
अनुच्छेद 19
[#] श्रीमान् उपाध्यक्ष ः संशोधन सं. 596, डॉ. अम्बेडकर।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बई - जनरल) ः महोदय, मैं प्रस्ताव करने की प्रार्थना करता हूँ-
फ्कि अनुच्छेद 19 की धारा (2) में, शब्द ‘प्रतिबाधित करना’ के लिए शब्द ‘रोकना’ प्रतिस्थापित किया जाए।य्
हमने अन्य अनुच्छेदों में जिस भाषा का उपयोग किया है उसी के अनुरूप भाषा में एकरूपता बनाये रखने के उद ् देश्य से ऐसा किया गया है।
ऽ ऽ ऽ ऽ
[♥] माननीय श्री के. सन्थानम ः महोदय, हमने एक निदेश स्वीकार किया है जिसमें हमने राज्य को एक समान नागरिक संहिता बनाने का प्रयास करने को कहा है और यह विशेष संशोधन उस निदेश का सीधा-सीधा प्रतिवाद है। उस आधार पर भी, मैं सोचता हूँ कि यह इस संबंध में पूर्णतया अनुपयुक्त है।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः डॉ. अम्बेडकर, क्या आप इस मामले में कुछ कहना चाहेंगे? श्रीमान् सन्थानम द्वारा समाने रखे गये तर्कों के आधार पर इस संशोधन के उचित होने या न होने के बारे में मैं आपकी राय जानना चाहता हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं श्रीमान् रंगा के साथ किसी दूसरे संशोधन पर चर्चा कर रहा था और इसलिए ......................
माननीय श्री के. सन्थानम ः वैयक्तिक कानून के बारे में संशोधन संख्या 612 प्रस्तावित किया जाना है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः इस मुद ् दे को पहले ही निपटाया जा चुका है जब हमने निदेशात्मक सिद्धांतों पर चर्चा की थी, और तब भी जब हमने उस दिन एक अन्य संशोधन पर चर्चा की थी।
ऽ # ♥ सी.ए.डी., अंक सी.ए.डी., अंक वही, पृ. 629-30 VIIVII, 3 दिसम्बर, 1948, पृ. 815, 3 दिसम्बर, 1948, पृ. 826