95
♣ श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मेरे पास सूची में 15 संशोधन हैं जिनमें से अधिकतर सदन में प्रस्तावित किए जा चुके हैं। मेरे विचार से, विभिन्न कोणों से इस विशेष अनुच्छेद पर विचार रखे गये हैं। हमारे पास सात और आठ वक्ता थे जिन्होंने अपने विचार व्यक्त किए। मेरे विचार से इस अनुच्छेद पर पर्याप्त बहस हो चुकी है। मैं डॉ. अम्बेडकर से उत्तर देने का अनुरोध करता हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान् उपाध्यक्ष महोदय, मैं उन वक्ताओं के विचारों में कुछ नहीं जोड़ सकता जो इस अनुच्छेद के समर्थन में बोले हैं। मैं जो कहना चाहता हूँ वह यह है कि एकमात्र संशोधन जिसे मैं स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ वह संशोधन सं. 609 है।
श्री एच.बी. कामथ ः क्या मैं पूछ सकता हूँ कि क्या यह पर्याप्त होगा यदि डॉ. अम्बेडकर कहते हैं - फ्मैं विरोध करता हूँ, मेरे पास कहने के लिए कुछ भी नहीं हैय्? मेरे विचार से सदन के भले के लिए उन्हें संशोधनों में उठाये गये मुद ् दों और बहस के दौरान उठे मुद ् दे का उत्तर देना चाहिए।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः यदि मैं गलत नही हूँ, तो हम विभिन्न संशोधनों को अस्वीकार करने के कारणों को बताने के लिए डॉ. अम्बेडकर को मजबूर नहीं कर सकते।
श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद (प. बंगाल - मुसलमान) ः श्रीमान् उपाध्यक्ष महोदय, क्या मैं कह सकता हूँ कि संशोधन सं. 609 जो डॉ. अम्बेडकर द्वारा स्वीकार कर लिया गया है, मात्र एक शाब्दिक संशोधन है?
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः यह कार्यवाहियों में दर्ज किया जाएगा। अब हम एक के बाद एक संशोधन पर विचार करेंगे।
¹अधोलिखित संशोधन डॉ. अम्बेडकर द्वारा स्वीकार कर लिया गया और सदन द्वारा स्वीकृत हुआ। सब मिलाकर 12 संशोधन अस्वीकृत हुए और एक वापस ले लिया गया।ह्
फ्कि अनुच्छेद 19 की धारा (2) में, शब्दों ‘प्रतिबाधित करना’ को शब्द ‘रोकना’ से प्रतिस्थापित किया जाए।य्
संशोधन स्वीकृत हुआ।
ऽ ऽ ऽ ऽ
ख्ऽ, श्रीमान् उपाध्यक्ष ः प्रश्न है-
फ्कि अनुच्छेद 19 की धारा (2) की उपधारा (ख) में शब्दों फ्किसी वर्ग या प्रवर्गय् के लिए शब्दों फ्सभी वर्ग या प्रवर्गय् को प्रतिस्थापित किया जाए।य्
क्या आपने इसे स्वीकार कर लिया है, डॉ. अम्बेडकर?
♣ ऽ सी.ए.डी., अंक सी.ए.डी., अंक VIIVII, 6 दिसम्बर, 1948, पृ. 839, 3 दिसम्बर, 1948, पृ. 836