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अनुच्छेद 15 (क्रमागत)
ख्ऽ, श्रीमान् उपाध्यक्ष (डॉ. एच.सी. मुखर्जी) ः अब हम अनुच्छेद 15 पर आम चर्चा फिर से शुरू कर सकते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बई - जनरल) ः महोदय, क्या मैं आपसे निवेदन कर सकता हूँ कि इस मामले को थोड़ी देर के लिए स्थगित किया जाए?
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः क्या सदन की यही इच्छा है?
माननीय सदस्य ः हाँ।
अनुच्छेद 20
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः तब हम अगले अनुच्छेद पर आते हैं अर्थात ् अनुच्छेद 20 पर।
सदन के समक्ष प्रस्ताव है-
फ्कि अनुच्छेद 20 संविधान का हिस्सा बन गया है।य्
मेरे पास संशोधनों की एक शृंखला है जिसे मैं पढ़ूंगा। संशोधन सं. 613 की अनुमति नहीं है क्योंकि यह नकारात्मक प्रभाव वाला है। सं. 614 और सं. 618 लगभग एक जैसे हैं, सं. 614 प्रस्तावित किया जा सकता है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ -
फ्कि अनुच्छेद 20 में शब्द फ्सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीनय् अन्तर्विष्ट किए जाएं।य्
महोदय, यह मात्र एक त्रुटि थी। माननीय सदस्य देखेंगे कि ये शब्द अनुच्छेद 19 को भी नियंत्रित करते हैं, सच्चाई के तौर पर इन्हें अनुच्छेद 20 को भी नियंत्रित करना चाहिए था क्योंकि धर्म से संबंधित इन मामलों में पूर्ण अधिकार देने का उद ् देश्य नहीं है। राज्य इन सभी संस्थाओं और इनके कार्यकलापों को नियमित करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रख सकता है जब कभी भी सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य को इसकी आवश्यकता होती है।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः यदि अनुच्छेद सं. 616 पर जोर दिया जाता है तो मैं इसको मतदान के लिए रख सकता हूँ। क्या किसी सदस्य को इस मामले में कुछ कहना है?
ऽ ऽ ऽ ऽ
¹संशोधन सं. 616 प्रस्तावित नहीं किया गया।ह्
ऽ सी.ए.डी., अंक VIII, दिसम्बर, 1948, पृष्ठ 859