98 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
[#] श्रीमान् तजामुल हुसैन -
फ्प्रत्येक धर्म सम्प्रदाय या इसके किसी भाग को (अ) धार्मिक और पुण्यार्थ उद ् देश्यों के लिए संस्थानों को स्थापित करने और चलाने का अधिकार होगा_य्
ठीक यही शब्द अनुच्छेद में है। मैं इन शब्दों को वही बनाये रखना चाहता हूँ जहाँ ये हैं। मैं नहीं चाहता कि इन्हें निकाल दिया जाए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मुझे कुछ नहीं कहना है।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं अब संशोधनों को एक-एक करके मतदान के लिए रखूँगा।
प्रश्न है-
फ्कि अनुच्छेद 20 में शब्दों ‘‘सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीनय् को अन्तर्विष्ट किया जाए।य्
संशोधन स्वीकृत हुआ।
¹अन्य चार संशोधन अस्वीकृत हुए।ह्
अनुच्छेद 20, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ दिया गया।
नया अनुच्छेद 20-क
[♦] माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं संशोधन सं. 632 या 633 को स्वीकार नहीं करता।
श्री एच.जे. खाण्डेकर (सी.पी. और बेरार - जनरल) ः महोदय, मैं बोलना चाहता हूँ।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मुझे खेद है कि अब बहुत देर हो चुकी है। मैं अब संशोधनों को मतदान के लिए रखूँगा।
¹अधोलिखित दोनों संशोधन अस्वीकृत हुए।ह्
(1) फ्कि अनुच्छेद 21 में, शब्द, ‘जो के बाद शब्द पूर्णतः या अंशत’ को
अन्तर्विष्ट किया जाएं।य्
(2) फ्कि अनुच्छेद 21 में शब्दों फ्दि प्रोसीड ् स ऑफ व्हिच आरय् के लिए
शब्दों फ्आन एनी इनकम व्हिच इजय् को प्रतिस्थापित किया जाए।य्
अनुच्छेद 21 संविधान में जोड़ दिया गया।
# ♦ सी.ए.डी., अंक सी.ए.डी., अंक VIIVII, 7 दिसम्बर, 1948, पृ. 863, 7 दिसम्बर, 1948, पृ. 866