अनुच्छेद 22 - Page 115

100 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

शायद उन विचारों की बहुलता की दृष्टि से इस अनुच्छेद के उद ् देश्य को विस्तार से समझाना वांछनीय है जो सदन में व्यक्त किए गए हैं। विभिन्न संशोधन जो प्रस्तावित किए गये हैं उनसे यह स्पष्ट हो जाता है कि तीन विभिन्न दृष्टिकोण हैं। एक दृष्टिकोण मेरे मित्र श्रीमान् इस्माइल का है जो मद्रास से हैं। उनकी राय में धार्मिक शिक्षण दिये जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। जिस एकमात्र प्रतिबंध के वह पक्षधर हैं वह है कि किसी को इसे ग्रहण करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

यदि मैंने उन्हें सही समझा है तो यही वह विचार है जिसके वह पक्षधर हैं। एक और दृष्टिकोण है जिसका प्रतिनिधित्व मेरे मित्र श्रीमान् मान और श्रीमान् तजामुल हुसैन करते हैं। उनके अनुसार, धार्मिक शिक्षण बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए, ऐसे संस्थानों में भी नहीं जो शैक्षणिक हैं। उसके बाद तीसरा दृष्टिकोण है और वह प्रो. के.टी. शाह द्वारा व्यक्त किया गया है। वह कहते हैं कि न केवल उन संस्थानों में जो पूर्णतया राज्यकोष द्वारा सम्पोषित हैं बल्कि ऐसे शैक्षणिक संस्थानों में भी जो आंशिक रूप से राज्यकोष द्वारा सम्पोषित हैं, किसी प्रकार के धार्मिक शिक्षण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

अब मैं यह कहने का साहस करता हूँ कि प्रारुप जैसा यह है कि मध्य मार्ग अपनाता है, जो मैं आशा करता हूँ, सदन को स्वीकार्य होगा। मेरे विचार से तीन कारण हैं जो श्रीमान् इस्माइल के इस विचार को स्वीकार करने का विरोध करते हैं कि धार्मिक शिक्षण पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए, बल्कि धार्मिक शिक्षण उपलब्ध कराया जाना चाहिए_ और मैं इन कारणों का संक्षेप में उल्लेख करूँगा।

पहला कारण चह है कि हमने अनुच्छेद 21 में निहित यह सिद्धांत स्वीकार कर लिया है कि करों द्वारा अर्जित कोष को किसी विशेष समुदाय के लाभार्थ प्रयोग में नही लाया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि हम किसी विशेष धार्मिक शिक्षण की अनुमति देते हैं, यदि एक स्थानीय या जिला बोर्ड द्वारा स्थापित कोई विद्यालय इस आधार पर धार्मिक शिक्षण देता है कि उसमें पढ़ने वाले बहुसंख्यक विद्यार्थी हिन्दू हैं तो इसका प्रभाव यह होगा कि इस प्रकार का कृत्य अनुच्छेद 21 के प्रावधानों के विपरीत होगा। जिला बोर्ड अपने क्षेत्र में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति से कर वसूल रहा होगा। यह एक आम कर होगा और यदि दिये जाने वाला धार्मिक शिक्षण बहुसंख्यक समुदाय के बच्चों तक सीमित हैं तो यह अनुच्छेद 21 का दुरुपयोग होगा, क्योंकि मुस्लिम समुदाय के बच्चे या किसी अन्य समुदाय के बच्चे जो इस धार्मिक शिक्षण को ग्रहण करने की परवाह नहीं करते फिर भी वे स्थानीय जिला बोर्ड के कृत्य से स्थानीय बोर्ड कोष में योगदान करने के लिए मजबूर होंगे।

दूसरी कठिनाई पहली से अधिक वास्तविक है, यथा, हमारे देश में धर्मों की बहुलता है। उदाहरण के लिए, एक शहर बम्बई लें जिसमें विभिन्न पंथों में विश्वास रखने वाली विविध प्रकार की जनसंख्या है। मान लें, इस शहर में नगरपालिका द्वारा सम्पोषित एक