अनुच्छेद 22 - Page 119

104 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद ः माननीय सदस्य ने धारा (3) के विलोपन को स्वीकार करने का प्रस्ताव रखा है। यह एक व्याख्यात्मक नोट है। मैं पूछता हूँ कि क्या इसका विलोपन इसमें निहित सिद्धांत के प्रयोग को विलोपन के अलावा भी रदद कर देगा। ्

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मेरा विचार है कि धारा (3) वास्तव में अनावश्यक है। यह एक समुदाय द्वारा सम्पोषित विद्यालय से संबंधित है। विद्यालय की समयावधि के पश्चात ् समुदाय इसका इच्छानुसार प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र है। संविधान में बिल्कुल भी कोई प्रावधान नहीं होना चाहिए।

अब, महोदय, एक दूसरा प्रश्न है जिसके बारे में मैं उल्लेख करना चाहूँगा और वह प्रश्न प्रो. के.टी. शाह द्वारा रखा गया है और इस प्रकार है कि प्रतिबंध राज्य को ऐसे संस्थानों में धार्मिक शिक्षण देना जारी रखने की अनुमति देता है जिनकी न्यासिता राज्य ने स्वीकार कर ली है। मैं नहीं समझता कि वास्तव में प्रो. के.टी. शाह द्वारा उठाया गया प्रश्न कुछ अधिक अर्थपूर्ण है। मेरे विचार से उन्हें अहसास होगा कि ऐसे भी मामले रहे हैं जहाँ इतिहास के शुरू के दौर में संस्थानों को धार्मिक शिक्षण देने के उद ् देश्य से स्थापित किया गया और कुछ कारणों के चलते उनके पास प्रबंध करने के लिए लोग नहीं थे और उनके न्यासी के रूप में राज्य ने उन्हें अपने नियंत्रण में ले लिया। अब यह स्पष्ट है कि जब आप एक न्यास को स्वीकार करते हैं तो उस न्यास की आपको हर प्रकार से पूर्ति करनी चाहिए। यदि राज्य ने इन संस्थानों को पहले ही अपने नियंत्रण में ले लिया है और स्वयं को न्यासी की स्थिति में रख लिया है तब, स्पष्टतया, आप सरकार से यह नहीं कह सकते कि इस सच्चाई के बावजूद आप इन संस्थानों में धार्मिक शिक्षण दे रहे हैं, भविष्य में आप ऐसा शिक्षण नहीं देंगे। मैं समझता हूँ कि यह केवल राज्य को विश्वास भंग की अनुमति प्रदान करना ही नहीं होगा बल्कि उसे विश्वास भंग करने के लिए मजबूर करना होगा। इसलिए स्थिति को स्पष्ट करने के लिए, हमने सोचा कि ऐसे प्रतिबंध को शामिल करना आवश्यक और वांछनीय था जो निस्संदेह कुछ सीमा तक अनुच्छेद 20 की उपधारा (1) में निहित मूल सिद्धांत के संगत नहीं है। महोदय, मैं आशा करता हूँ, सदन पाएगा कि यह अनुच्छेद जैसा है, संतोषप्रद है और इसे स्वीकार किया जा सकता है।

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं अब एक के बाद एक, संशोधनों को मतदान के लिए रख रहा हूँ।

¹कुल मिलाकर, 12 संशोधन अस्वीकृत हुए। केवल श्रीमान् कपूर का संशोधन जैसा नीचे दिखाया गया है डॉ. अम्बेडकर द्वारा स्वीकार किया गया और अपना लिया गया।ह्

प्रश्न है-

फ्कि अनुच्छेद 22 की धारा (3) को निकाल दिया जाए।य्

¹अनुच्छेद 22, जैसा कि संशोधित किया गया, अपना लिया गया और संविधान में जोड़ दिया गया है।ह्