अनुच्छेद 23 (जारी) - Page 123

108 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

लेकिन फिर भी वे सांस्कृतिक और भाषाई अर्थ में अल्पसंख्यक हैं। उदाहरणार्थ, इस अनुच्छेद 23 के उददेश्य हेतु, यदि निश्चित संख्या में लोग मद्रास से आते हैं और किन्हीं उद ् देश्यों ् की पूर्ति के लिए बम्बई में बस जाते हैं तो यद्यपि ये पारिभाषिक अर्थ में ‘अल्पसंख्यक’ नहीं होंगे, पर वे सांस्कृतिक अल्पसंख्यक होंगे। इसी तरह, यदि निश्चित संख्या में मराठी महाराष्ट्र से जाकर बंगाल में बस जाते हैं तो यद्यपि वे पारिभाषिक अर्थ में अल्पसंख्यक नहीं भी हो सकते हैं लेकिन वे सांस्कृतिक और भाषाई अर्थ में बंगाल में अल्पसंख्यक होंगे। यह अनुच्छेद संस्कृति, भाषा और लिपि के मामलों में केवल उन अल्पसंख्यकों को ही सुरक्षा देने का इरादा नहीं रखता जो पारिभाषिक अर्थ में अल्पसंख्यक हैं बल्कि उन अल्पसंख्यकों को भी सुरक्षा देंगे का इरादा रखता है जो व्यापक अर्थ में अल्पसंख्यक हैं जैसा मैंने अभी स्पष्ट किया है। यही कारण है जिसकी वजह से हमने ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को निकाल दिया क्योंकि हमने महसूस किया कि शब्द की संकुचित अर्थ में व्याख्या की जा सकती थी कि जब इस सदन का इरादा जब इसने अनुच्छेद 18 पारित किया शब्द ‘अल्पसंख्यक’ को कहीं अधिक व्यापक अर्थ में प्रयोग करना था ताकि उन लोगों को सांस्कृतिक सुरक्षा दी जा सके जो पारिभाषिक अर्थ में अल्पसंख्यक थे पर थे फिर भी अल्पसंख्यक। यह महसूस किया गया कि यह सुरक्षा इसलिए जरूरी थी और इसका सीधा सा यह कारण था कि जो लोग एक प्रांत से दूसरे प्रांत में जाते हैं और वहाँ बस जाते हैं, वे वहाँ हमेशा के लिए नहीं बसते। वे स्वयं को उस प्रांत से उखाड़ते नहीं हैं, जहाँ से वे स्थानांतरित हुए हैं बल्कि वे उसके साथ अपने संबंध रखते हैं। वे शादी के उददेश्य से अपने प्रांत में वापस ् जाते हैं। वे अपने प्रांत में और भी विभिन्न कारणों से वापस चले जाते हैं, और यदि यह सुरक्षा उन्हें नहीं दी जाती है जब वे स्थानीय विधायिका के अधीन होते हैं और वह स्थानीय विधायिका उनको अपनी संस्कृति संरक्षित रखने का अवसर नहीं देती है तो इन सांस्कृतिक अल्पसंख्यकों को अपने प्रांतों में वापस जाने में और स्वयं को मूल जनसंख्या जिससे वे संबंधित हैं में सम्मिलित करने में कठिनाई होगी। एक प्रांत से दूसरे प्रांत में स्थानांतरण की स्थिति का सामना करने के लिए हमने महसूस किया कि यह वांछनीय है कि इस तरह का कोई प्रावधान संविधान में शामिल किया जाना चाहिए।

मेरे विचार से एक अन्य बात जो हमें अनुच्छेद 23 पढ़ते समय ध्यान में रखनी चाहिए वह यह है कि राज्य के लिए कर्त्तव्य या भार निर्धारित नहीं करता। यह नहीं कहता कि, उदाहरण के लिए, जब मद्रास के लोग बम्बई आते हैं तब बम्बई की सरकार को तमिल भाषा या आन्ध्र की भाषा या किसी अन्य भाषा में शिक्षा देने की परियोजना के लिए अर्थप्रबंध करना होगा। राज्य के ऊपर कोई बोझ नहीं डाला गया है। एकमात्र प्रतिबंध जो अनुच्छेद 23 द्वारा लगाया गया है वह है कि यदि वहाँ कोई सांस्कृतिक अल्पसंख्यक हैं जो अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को संरक्षित रखना चाहते हैं तो राज्य कानून द्वारा उनके ऊपर कोई स्थानीय या कोई अन्य संस्कृति नहीं थोपेगा। इसलिए इस अनुच्छेद को वास्तव में कहीं अधिक व्यापक अर्थ में पढ़ना चाहिए और यह केवल उन्हीं अल्पसंख्यकों पर ही लागू नहीं होता जिन्हें मैं पारिभाषिक अल्पसंख्यक कहता