अनुच्छेद 23 (जारी) - Page 125

110 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

विद्यार्थियों की उपलब्ध है। मैं अपने मित्र श्रीमान् करीमुददीन का ध्यान इस ओर आकृष्ट ् करना चाहूँगा कि उनका संशोधन वास्तव में उस कठिनाई को दूर नहीं करता है जो उनके सिद्धांत को स्वीकार करने में है। पहली, यह कौन तय करेगा कि पर्याप्त संख्या यह है? मुझे एक उदाहरण देने दें। मान लीजिए कि मामले को कार्यपालिका पर छोड़ा जाना है, जैसा कि यह अवश्य छोड़ा जाना चाहिए, और कार्यपालिका ने एक नियम बना दिया कि जब एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा चाहने वाले ऐसे 49 प्रतिशत बच्चे होंगे तब और केवल तब इसे एक पर्याप्त संख्या माना जायेगा। क्या यह उन्हें संतुष्ट कर देगा यदि इस प्रकार का प्राधिकार कार्यपालिका के लिए छोड़ दिया जाता है? उसके बाद, मान लीजिए, आप इस मामले को वाद योग्य मामला बना देते हैं, क्या निस्संदेह यह होगा जब आप इसे मूलाधिकार के तौर पर शामिल कर रहे हैं और कोई मूलाधिकार तब तक मूल नहीं है जब तक यह वाद योग्य नहीं है, क्या यह सही है, क्या यह वांछनीय है कि यह मामला कि किसी विद्यालय में एक पर्याप्त संख्या उपलब्ध थी या नहीं कानून की अदालत में घसीटा जाये अदालत द्वारा तय किए जाने के लिए? मैं कठिनाई से बाहर निकलने का और कोई उपाय नहीं देखता। या तो आपको शब्द ‘पर्याप्त’ की व्याख्या आवश्यक रूप से कार्यपालिका पर छोड़ देनी चाहिए या फिर न्यायपालिका पर और मेरे विचार में अल्पसंख्यक के लिए अपना उददेश्य पाने के लिए इनमें से कोई भी तरीका सुरक्षित नहीं होगा। इसलिए मेरा ् कहना है कि हमें इस सच्चाई से संतुष्ट होना चाहिए कि यह एक ऐसा सर्वमान्य सिद्धांत है कि कोई प्रांतीय सरकार जनसंख्या के एक बहुत बड़े भाग के शैक्षणिक अधिकारों को क्षति पहुँचाये बगैर इसे न्यायसंगत ढंग से रदद नहीं कर सकती। इसलिए, मैं अनुरोध करता ् हूँ कि अनुच्छेद, यथासंशोषत रूप में सदन द्वारा स्वीकार कर लिया जाना चाहिए।

ऽ ऽ ऽ ऽ

¹अधोलिखित 3 संशोधनों को स्वीकार कर लिया गया। 6 संशोधन अस्वीकृत हुए।ह्

(1) फ्कि अनुच्छेद 23 की धारा (1) में, शब्दों ‘लिपि और संस्कृति’ के लिए

शब्दों ‘लिपि या संस्कृति’ को प्रतिस्थापित किया जाए।य्

(2) फ्कि अनुच्छेद 23 की धारा (3) में, शब्द ‘समुदाय’ जहाँ कहीं भी यह

आया है निकाल दिया जाए।य्

(3) फ्कि अनुच्छेद 23 की धारा (2) के लिए अधोलिखित को प्रतिस्थापित

किया जाए-

फ्किसी नागरिक को राज्य द्वारा सम्पोषित किसी शैक्षणिक संस्थान या ऐसे किसी शैक्षणि्

ाक संस्थान जो राज्य कोष से सहायता प्राप्त करता है, में केवल धर्म, प्रजाति, जाति,

भाषा या इनमें से किसी के आधार पर प्रदेश से वंचित नहीं किया जायेगा, और अनुच्छेद

23 की उपधाराओं (अ) और (ब) को पुनः अनुच्छेद 23-अ की संख्या दी जाए।य्

¹अनुच्छेद 23, यथासंशाधित रूप में, संविधान में जोड़ दिया गया।ह्