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ख्ऽ, माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं इस संशोधन का विराध करता हूँ।
श्रीमान् उपाध्यक्ष - मैं अब संशोधन पर मत लूंगा।
(प्रो. शाह का संशोधन अस्वीकृत हुआ।
[♣] श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद (प. बंगाल मुसलमान) ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ-
फ्कि अनुच्छेद 1 के ऊपर शीर्षक के शुरू में शब्द और रोमन संख्या ‘अध्याय 1’ को अन्तर्विष्ट किया जाए।य्
(इसके बाद श्रीमान् अहमद का भाषण हुआ।)
[@ ] माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इस संशोधन का विरोध करता हूँ।
(प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ)
[# ] माननीय पडित गोविन्द वल्लभ पंत (संयुक्त प्रांत-जनरल)ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ कि अब हम अनुच्छेद दो पर आ जायें और अनुच्छेद 1 के शेष संशोधनों पर चर्चा स्थगित कर दें। अभी तक हम इस महत्वपूर्ण बिन्दु पर सर्वसम्मति नहीं बना पाये हैं। मुझे आशा है कि यदि चर्चा स्थगित कर दी जाये तो कोई ऐसा हल निकलना सम्भव है जो सभी को स्वीकार हो। इसलिए इससे कुछ भी नुकसान न होगा-
¹श्रीमान् पंत के सुझाव का श्रीमान् आर.के. सिधवा ने सर्म्थन किया।ह्
त्र् माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं पं. गोविन्द वल्लभ पंत के सुझाव का समर्थन करता हूँ।
सेठ गोविन्द दास (सी.पी. एवं बेरार जनरल) ः महोदय, मैं अन्तःकरण से पंडित पंत के प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ .....
श्री एच.वी. कामथ ः मैं केवल यह जानना चाहता हूँ कि कितने समय तक संशोधनों को रोककर रखा जाएगा।
एक माननीय सदस्य ः यह एक दिन, एक सप्ताह या एक पखवाड़ा भी हो सकता है।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं मानता हूँ कि इन कुछ संशोधनों पर चर्चा तब तक के लिए स्थगित कर दी जानी चाहिए जब तक किसी प्रकार की सहमति पर पहुँचने के लिए पर्याप्त समय सदन के पास उपलब्ध नहीं हो जाता। यह सदन तथा देश के व्यापक हित में होगा।
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ऽ ♣ @# त्र् सी.ए.डी., अंक वही, पृष्ठ 430 सी.ए.डी., (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक वही, पृष्ठ 431सी.ए.डी., (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VII, 15 नवम्बर, 1948, पूष्ठ 431 VIIVII, 15 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 430, 15 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 426