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[$] श्रीमान् नज़ीरूद्दीन अहमद ः ...... इस संबंध में मेरा अगला संशोधन जिसका मैं प्रस्ताव करता हूँ, इस प्रकार है-
फ्कि अनुच्छेद 2 में, ‘समय-समय पर’ शब्दों को निकाल दिया जाए।य्
¹श्रीमान् अहमद अपने संशोधन की व्याख्या करते हैं।ह्
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# श्री एम. अनन्तशयनम आयंगर ः महोदय, मैं इन संशोधनों का विरोध करता हूँ। ये मौखिक मामले हैं और अनुरोध करता हूँ कि ऐसे संशोधनों की अनुमति न दी जाये। मैं अब आपसे इस पर मत लेने का निवेदन करता हूँ।
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ऽ माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान् कामथ ने जो कहा उस पर हम गौर करेंगे।
अनुच्छेद 2 संविधान में जोड़ दिया गया।
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अनुच्छेद 3
[♣] माननीय श्री के. सन्थानम (मद्रास - जनरल) ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ -
फ्कि अनच्छेद 3 की धारा (अ) में, अधोलिखित शब्दों को जोड़ा जाए -
‘अथवा राज्यों या राज्यों के हिस्सों में दूसरे क्षेत्रों को जोड़ने से’।य्
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श्री एम. अनन्तशयनम अयंगर ः मैं सदन से इस संशोधन को स्वीकार करने का निवेदन करता हूँ क्योंकि केवल इसके जुड़ने से ही अनुच्छेद पूर्ण होगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान् उपाध्यक्ष, मैं अपने मित्र श्रीमान् सन्थानम के संशोधन से सिद्धांततः सहमत हूँ महत्वपूर्ण यह है कि मैं इसकी भाषा में थोड़ा परिवर्तन चाहता हूँ जिससे यह इस प्रकार पढ़ा जाए फ्अथवा किसी राज्य के एक हिस्से में किसी क्षेत्र को जोड़ते हुए।य्
माननीय श्री के. सन्थानम ः मैं परिवर्तन से सहमत हूँ।
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।
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$ # ऽ ♣ सी.ए.डी., अंक वही, पृष्ठ 43 सी.ए.डी., (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक वही, पृष्ठ 435 5 VII, 15 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 435 VII, 15 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 435