अनुच्छेद 3 - Page 29

14 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

रायबहादुर श्यामानन्दन सहाय (बिहार-जनरल) ः महोदय, क्या मैं एक अनुरोध कर सकता हूँ? मेरे विचार से यदि डॉ. अम्बेडकर अपने अगले संशोधन का प्रस्ताव करते हैं तो चीजें स्पष्ट हो जाएंगी और हम जैसों के लिए जिनके नाम में संशोधन हैं यह तय करना आसान हो जाएगा कि हम उसका प्रस्ताव करें या नहीं।

श्रीमान् उपाध्यक्ष - मैं आपसे पूर्णतया सहमत हूँ। डॉ. अम्बेडकर अपने संशोधन का प्रस्ताव कर सकते हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ-

फ्कि अनच्छेद 3 में विद्यमान प्रतिबंध के लिए अधोलिखित प्रतिबंध को प्रतिस्थापित किया जाए -

फ्बशर्ते कि संसद के किसी भी सदन में इस उद ् देश्य हेतु कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश के अलावा और तब तक पेश नहीं किया जाएगा, जब तक कि -

(क) इस विधेयक में निहित प्रस्ताव प्रथम अनुसूची के भाग I में अस्थायी तौर

पर उल्लिखित किसी राज्य या राज्यों के नाम व सीमाओं को, उस राज्य

की विधानसभा अथवा यदि विधायिका दो सदन वाली है तो उसके दोनों

सदनों या प्रत्येक राज्य की विधानसभा, जैसी भी स्थिति हो, के विधेयक

को पेश करने के प्रस्ताव तथा विधेयक के प्रावधानों के विषय से संबंधित

विचारों को जिन्हें राष्ट्रपति जान चुका है, को प्रभावित नहीं करता_ और

(ख) यह प्रस्ताव प्रथम अनुसूची के भाग III में अस्थायी तौर पर उल्लिखित

किसी राज्य या राज्यों के नाम व सीमाओं, उस राज्य अथवा प्रत्येक राज्य

से प्रस्ताव को पूर्व स्वीकृति, जैसी भी स्थिति हो, जो प्राप्त कर ली गई है

को प्रभावित नहीं करता’।य्

श्रीमान् उपाध्यक्ष, यदि कोई संशोधित प्रतिबंध की उस मूल प्रतिबंध से तुलना करना चाहे जो प्रारुप संविधान में रखा गया था, तो सदस्य पायेंगे कि नये संशोधन में दो परिवर्तन हुए हैं। एक, मूल प्रारुप में विधेयक को पेश करने की शक्ति विशेष रूप से केवल भारत सरकार को दी गई थी। मूल प्रारुप के तहत संसद के किसी भी सदस्य के पास यह शक्ति नहीं थी कि वह इस तरह का विधेयक प्रस्तुत कर सके। प्रारुप समिति का ध्यान इस सच्चाई की ओर आकृष्ट किया गया कि संसद सदस्यों के इस अधिकार में यह कुछ हद तक कड़ी और अनावश्यक कटौती है जिसके तहत वे अपनी पसंद के प्रस्ताव प्रस्तावित करते हैं और जिससे ये संबद ् ध होते हैं। परिणामस्वरूप, हमने इस प्रतिबंध को निकाल दिया जो यह शक्ति विशेष रूप से केवल भारत सरकार को देता था और हमने यह शक्ति राष्ट्रपति को दे दी और कहा कि इस प्रकार का कोई भी विधेयक चाहे यह भारत सरकार द्वारा लाया गया हो या किसी व्यक्तिगत सदस्य द्वारा उसके पीछे राष्ट्रपति की सिफारिश होनी चाहिए।

ऽ सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VII, 17 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 439-40