16 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय श्री के. सन्थानम ः लेकिन, दुर्भाग्य से, अपने उत्साह के कारण क्योंकि उन्होंने अपने सिद्धांत के प्रति उत्साह दिखाते हुए एक ऐसा संशोधन प्रस्तुत कर दिया है जो उनके उद ् देश्य को ही विफल कर देता है। मैं, इसलिए, सुझाव देता हूँ कि इस संशोधन को अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए और डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव को स्वीकार कर लेना चाहिए।
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श्रीमान् उपाध्यक्ष ः हम श्रीमान् सिधवा को सुनें कि वह क्या कहते हैं। हम उन संशोधनों को निश्चित रूप से लेंगे जिनकी ओर श्रीमान् कामथ ने ध्यान आकृष्ट किया है।
श्री आर.के. सिधवा ः मैं प्रो. शाह द्वारा प्रस्तावित संशोधन के विरोध में दिए गए श्रीमान् सन्थानम के तर्कों से सहमत नहीं हूँ .......
........ डॉ, अम्बेडकर का संशोधन पूर्णतया स्पष्ट है और विस्तृत है ........
....... मैं, इसलिए, डॉ. अम्बेडकर के संशोधन की सदन के लिए सिफारिश करता हूँ।
¹नज़ीरुद ् दीन अहमद का संशोधन प्रस्तावित नहीं किया गया।ह्
ऽश्रीमान् उपाध्यक्ष ः पंडित हृदयनाथ कुँजरू।
पंडित हृदयनाथ कुँजरू (संयुक्त प्रांत - जनरल) ः श्रीमान् उपाध्यक्ष, मैं प्रस्ताव करता हूँ -
फ्कि डॉ. अम्बेडकर के संशोधन, जो अभी प्रस्तावित किया गया, में ‘पूर्व स्वीकृति’ शब्दों के लिए ‘विचार’ शब्द प्रतिस्थापित किया जाए।य्
¹इसके बाद भाषण और चर्चा हुई।ह्
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@ श्री रोहिणी कुमार चौधरी (असम-जनरल) ः महोदय, यह मेरा दुर्भाग्य है कि मुझे इस सदन के दो निष्ठावान सदस्यों, प्रो. शाह और पं. कुँजरू के संशोधनों का विरोध करना पड़ रहा है। मैं उनका विरोध इसलिए नहीं कर रहा कि मैं उन्हें कम पसन्द करता हूँ बल्कि इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि मुझे डॉ. अम्बेडकर का संशोधन अधिक पसन्द है क्योंकि यह वर्तमान स्थिति से अच्छी तरह मेल खाता है। .....
# श्री आर.के. सिधवा - (सी.पी. एवं बेरार - जनरल) ः ....... मैं चाहूँगा कि डॉ. अम्बेडकर सदन को इस बात से अवगत करायें कि किसलिए प्रांतों और राज्यों मे यह अंतर किया गया है ......
ऽ @ # वही, पृष्ठ 456-59सी.ए.डी., (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक वही, पृष्ठ 446 VII, 17 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 441