20 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
तरह से हस्तांतरित कर दी गई है, को भारत के प्रांत की तरह शासित किया जा सके ऐसी स्थिति में संविधान का भाग II जो भारतीय प्रांतों के संविधान को परिभाषित करता है स्वतः उस भारतीय राज्य पर लागू होगा या वह केन्द्र शासित प्रदेश की तरह प्रशासित किया जा सकता है_ ताकि राष्ट्रपति और केन्द्रीय संसद को उस विशेष क्षेत्र के लिए प्रशासन के किसी रूप को रचने के लिए पूरा-पूरा अधिकार हो। परिणामस्वरूप संदन से मेरा अनुरोध है कि इस विषय पर उत्तेजित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। अगर हम थोड़ा धैर्य रखें तो मुझे इसके बारे में जरा भी संदेह नहीं है कि भारतीय राज्यों के लिए हमारे मंत्री, जिन्होंने उस दुर्व्यवस्था को कम करने के लिए बहुत काम किया है जो हमारे संविधान बनाने के पूर्व व्याप्त थी, उस वास्तविक सच्चाई का प्रयोग करेंगे जो संघ सरकार ने प्राप्त कर ली है और दुर्व्यवस्था को और कम करेंगे और या तो भारतीय राज्यों को उन प्रावधानों को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करके जिन्हें हमने भारतीय राज्यों पर लागू किया है या अनुच्छेद 212 के प्रावधानों का अनुकरण करके एक आदेश निकालेंगे और पूरी सम्प्रभुता हमें सौंप देंगे ताकि भारत संघ भारतीय राज्यों से उसी प्रकार व्यवहार करने में सक्षम हो सके जैसे प्रांतों से करने में सक्षम है।
अभी के लिए मैं कहता हूँ कि हम इस समझौते का पालन करके बुद्धिमतापूर्ण कदम उठायेंगे जो दो वार्ता समितियों के बीच हुआ है और इसका आगे तब तक पालन करने में बुद्धिमानी होगी जब तक आगे के समझौते द्वारा हम दोनों पक्षों के प्रति सद ् भाव, शांति और सम्मान के साथ इसका आधारा बदलने की स्थिति में न हो जायें। महोदय, मैं संशोधन का विरोध करता हूँ। (सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त की।)
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः अब मैं संशोधन संख्या 150 जैसा कि पंडित एच.एन. कुँजरू के संशोधन द्वारा संशाधित किया गया, को मतदान के लिए रखता हूँ। (व्यवधान) कृपया मुझे अपनी इच्छानुसार कार्यवाहियों को संचालित करने दें।
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ऽ श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं अपना विनिर्णय देने जा रहा हूँ। सदन के नियमों के तहत मुझे जानकारी नहीं है कि ऐसा कुछ है जो किसी संशोधन के प्रस्तावक को उत्तर देने का अधिकार देता है। अगर मैने डॉ. अम्बेडकर को उत्तर देने के लिए कहा तो इसलिए कहा क्योंकि उनसे कुछ प्रश्न पूछे गये थे और मैने यह उचित समझा कि उन्हें अपनी स्थिति को स्पष्ट करने का एक अवसर दिया जाना चाहिए। यह मेरा विनिर्णय है।
अब मैं पंडित कुँजरू के संशोधन को मतदान के लिए रखूँगा।
¹प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ। केवल डॉ. अम्बेडकार का प्रस्ताव ही स्वीकृत हुआ।ह्
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ऽ सी.ए.डी., (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VII, 18 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 461