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# श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मुझे लगता है कि प्रो. के.टी. शाह का संशोधन और साथ ही संख्या 175 तक के संशोधनों का अगला सेट डॉ. अम्बेडकर के संशोधन के स्वीकार होने के बाद स्वतः अस्वीकृत हो जाता है।
(संशोधन संख्या 170 प्रस्तावित नहीं की गई।)
......... इसके साथ ही अनुच्छेद 3 पूरा हो गया है। क्या कोई व्यक्ति इस पूरे अनुच्छेद पर चर्चा करना चाहता है?
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रा (पं बंगाल - जनरल) ः यदि किसी माननीय सदस्य को दोबारा पूरे के पूरे अनुच्छेद पर बोलने की अनुमति दे दी जाती है तो क्या स्थिति होगी? क्या डॉ, अम्बेडकर को इस पर दोबारा उत्तर देने के लिए कहा जायेगा?
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः निश्चय ही नहीं।
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रा (पं बंगाल - जनरल) ः यह पूरा का पूरा अनुच्छेद अभी तक नहीं निबटाया गया है और डॉ. अम्बेडकर ने संशोधन का ही उत्तर दिय है, न कि पूरे अनुच्छेद का।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः हम माननीय सदस्य को सुनेंगे और यदि वह यही बातें दोहराते हैं तो हम उन्हें रुकने के लिए कहेंगे।
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रा ः इसीलिए डॉ. अम्बेडकर को उत्तर देने का अधिकार नहीं है?
श्रीमान् उपाध्यक्ष - नहीं।
श्री एम. अनन्तसयनम अयंगर (मद्रास - जनरल) ः यह काल्पनिक है। ऐसी कोई बात नहीं है।
ऽ ऽ ऽ ऽ
ऽ श्रीमान् उपाध्यक्ष - प्रश्न है-
फ्कि अनुच्छेद 3, जैसा संशोधित किया गया, संविधान का भाग बन गया है।य्
प्रस्ताव अपना लिया गया।
अनुच्छेद 4
श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद (बंगाल - मूसलमान) ः महोदय, मैं प्रस्ताव करने की प्रार्थना करता हूँ -
फ्कि अनुच्छेद 4 की धारा (1) में शब्द ‘इस संविधान के’ निकाल दिये जायें और समूर्ण प्रारुप संविधान में ये शब्द समान संदर्भ में जहाँ कहीं भी आते हैं निकाल दिये जायें_ और नई परिभाषा ( bb ) को अनुच्छेद 303 की धारा (1) में अन्तर्विष्ट किया जाये --
‘‘( bb ) ‘अनुच्छेद का अर्थ है इस संविधान का अनुच्छेद’।य्
¹इसके बाद भाषण हुआ।ह्
# ऽ सी.ए.डी., (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक वही, पृष्ठ 462 VII, 18 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 465-66