अनुच्छेद 4 - Page 37

22 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः माननीय सदस्य आदेश पत्र प्र अनुच्छेद 4 के बारे में संशोधन संख्या 181 तक अपने सभी संशोधनों का एक के बाद एक, प्रस्ताव कर सकते हैं, और जितना सम्भव हो उतना संक्षेप में करें।

श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद ः ........... महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ --

फ्कि अनुच्छेद 4 की धारा (1) में ‘अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3’ शब्दों के लिए ‘अनुच्छेद 2 या 3’ शब्दों और अंकों को प्रतिस्थापित किया जाए।य्

मैं अनुरोध करता हूँ कि शब्द ‘अनुच्छेद’ को दोहराने की आवश्यकता नहीं है जैसा कि धारा (1) में किया गया है और, वास्तव में इस प्रारुप संविधान में कई स्थानों पर किया गया है।

इसके बाद मैं प्रस्ताव करता हूँ।

फ्कि अनुच्छेद 4 की धारा (1) में, ‘अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3’ शब्दों के लिए ‘अनुच्छेद 3’ शब्द और अंक को प्रतिस्थापित किया जाए।य्

मैं अगला प्रस्ताव करता हूँ -

फ्कि अनुच्छेद 4 की धारा (1) में, ‘के लिए ऐसा प्रावधान लिए होगा’ शब्दों के लिए ‘भी प्रावधान करेगा’ शब्दों को प्रतिस्थापित किया जाए।य्

मैं इस अनुच्छेद के प्रति अपने आखिरी संशोधन का प्रस्ताव करता हूँ -

फ्कि अनुच्छेद 4 की धारा (2) में ‘के उद ् देश्य के लिए’ शब्दों को ‘के अर्थ के अन्दर’ शब्दों से प्रतिस्थापित किया जाए।य्

यह मात्र एक शाब्दिक संशोधन है।

ऽ ऽ ऽ ऽ

महबूब अली बेग साहिब बहादुर (मद्रास - जनरल) ः महोदय मैं संशोधन नं. 184 का प्रस्ताव करता हूँ -

फ्कि अनुच्छेद 4 की धारा (2) में, ‘अनुच्छेद 304 के उद ् देश्य के लिए’ शब्दों को ‘अनुच्छेद 304 के तहत’ शब्दों से प्रतिस्थापित किया जाए।य्

इन शब्दों को बनाये रखने से एक प्रकार की जटिलता आ जायेगी। इसलिए हमें इन शब्दों को ‘अनुच्छेद 304 के तहत’ शब्दों से प्रतिस्थापित कर देना चाहिए।

श्री एच.वी. कामथ ः श्रीमान् उपाध्यक्ष, आपकी आज्ञा से, मैं अपने माननीय मित्र श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद के संशोधन नं. 177 पर बहुत ही संक्षिप्त टिप्पणी करूँगा। इससे पहले कि आप डॉ. अम्बेडकर को उत्तर देने के लिए कहें, क्या मैं उनसे निवेदन कर सकता हूँ, उस स्थिति मे जब वह कहें कि संशोधन नं. 177 को अस्वीकृत कर दिया जाना चाहिए, कि वे अपने विरोध के कुछ कारण बतायें और केवल यही घिसा-पिटा सूत्र न दोहरायें ‘मैं इस संशोधन का विरोध करता हूँ’ .....