अनुच्छेद 28 - Page 40

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[#] माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बई - जनरल) ः महोदय, मुझे खेद है कि मैं दोनों में से कोई भी संशोधन स्वीकार नहीं कर सकता। [♣] श्रीमान् कामथ का संशोधन वास्तव में वाक्य-रचना में समाहित है जैसा कि यह अब है_ जैसा कि श्रीमान् कामथ पायेंगे शब्द ‘मूल’ इस भाग के सबसे पहले अनुच्छेद में आता है। इसलिए उनका यह उद ् देश्य कि इन सिद्धांतों को मूल माना जाए, इस अनुच्छेद की शब्दावली द्वारा पहले ही प्राप्त कर लिया गया है।

शब्द ‘निदेश’ के संबंध में मैं समझता हूँ कि यह आवश्यक है और महत्वपूर्ण है कि शब्द को बनाये रखा जाए क्योंकि यह समझा जाना चाहिए कि संविधान के इस भाग को कानून में बदलते हुए संविधान सभा, जैसा मैने कहा, भविष्य की विधायिका और कार्यपालिका को निदेश दे रही है कि वे किस तरीके से अपनी-अपनी शक्तियों का प्रयोग करेंगी। यदि शब्द ‘निदेश’ निकाल दिया जाता है तो मुझे भय है कि संविधान सभा इस भाग को कानून में बदलने के अपने उद ् देश्य में सफल नहीं हो पायेगी। यकीनन, जैसा कि कुछ व्यक्तियों का कहना है, इस भाग में इन सिद्धांतों को मात्र पवित्र घोषणाओं के तौर पर अंतर्विष्ट करना संविधान सभा का इरादा नहीं है। सभा का इरादा यह है कि भविष्य में विधायिका और कार्यपालिका दोनों ही मात्र दिखावा न करते हुए अपनी कार्यवाहियों में इन्हें आधार बनायें। इसलिए मेरा अनुरोध है कि दोनो ही फ्मूलय् और फ्निदेशय् जरूरी हैं और इन्हें बनाये रखना चाहिए।

¹श्रीमान् कामथ का प्रस्ताव अस्वीकृत हो गया।ह्

श्री एच.वी. कामथ ः महोदय मैं अपना संशोधन वापस लेने के लिए सदन की अनुमति चाहता हूँ।

सदन की अनुमति से, संशोधन वापस ले लिया गया।

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः हम अब संशोधन नं. 841 से 846 तक लेंगे। प्रस्तावक कृपया इन्हें एक-एक करके प्रस्तावित करेंगे और तब चर्चा होगी। संशोधन नं. 841 का स्वरूप नकारात्मक है, इसलिए इसे क्रम से बाहर किया गया है।

क्योंकि संबंधित सदस्य यहाँ नहीं है इसलिए संशोधन सं. 842 हो गया है।

संशोधन संख्या 843 से 846 तक - श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद।

श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद ः मैं संशोधन संख्या 843, 844 और 846 का प्रस्ताव करूँगा। मैं संशोधन करूँगा। मैं संशोधन नं. 845 प्रस्तावित नहीं करूँगा।

महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ।

फ्कि अनुच्छेद 28 में से शब्दों ‘तब तक संदर्भ को अन्यथा जरूरत नहीं है’ को निकाल दिया जाए।य्

# ♣ सी.ए.डी., (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक श्रीमान् कामथ के इस संशोधन में नं. 838 और 840 शामिल है। VII, 18 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 467