26 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
फ्कि अनुच्छेद 28 में से शब्दों फ्आवश्यकता हैय् के लिए शब्द ‘संकेत करता है’ प्रतिस्थापित किया जाए।य्
फ्कि अनुच्छेद 28 में, शब्दों फ्दि स्टेटय् के लिए शब्द ‘स्टेट’ प्रतिस्थापित किया जाए।य्
¹इसके बाद श्रीमान ् नज़ीरुद्दीन का भाषण हुआ।ह्
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ख्ऽ, माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं अपने मित्र श्रीमान ् नज़ीरुद्दीन अहमद के संशोधनों का विरोध करता हूँ। अनुच्छेद 28 में शब्द ‘दि स्टेट’ सोच-समझकर प्रयुक्त किए गए हैं। इस संविधान में शब्द ‘स्टेट’ का दो भिन्न-भिन्न अर्थों में प्रयोग किया गया है। इसका प्रयोग सामूहिक हस्ती जो या तो केन्द्र या प्रांत का प्रतिनिधित्व करती है के रूप में किया गया है, संविधान के कुछ हिस्सों में केन्द्र तथा प्रांत दोनों को ही ‘स्टेट’ के नाम से पुकारा जाता है। लेकिन वहाँ यह शब्द अपने सामूहिक अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। शब्द ‘दि स्टेट’ यहाँ सामूहिक तथा व्यष्टिवाचक दोनों ही अर्थों में प्रयुक्त हुआ है। यदि मेरे मित्र भाग III की सहायता लें जो संविधान के अनुच्छेद 7 से प्रारंभ होता है तो वह पायेंगे कि किस अर्थ में शब्द ‘स्टेट’ प्रयुक्त हुआ है। इस भाग में, जब तक संदर्भ की अन्यथा जरूरत नहीं है, ‘दि स्टेट’ में भारत सरकार, एवं भारत की संसद और राज्यों की सरकार तथा विधायिका और सभी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण शामिल हैं। इसलिए जहाँ तक निदेशात्मक सिद्धांतों का संबंध है, एक ग्राम पंचायत या एक जिला या स्थानीय बोर्ड भी ‘स्टेट’ कहलायेगा। जिस अर्थ में हमने शब्द का प्रयोग किया है उस अर्थ के भेद को स्पष्ट करने के लिए ही हमने ‘स्टेट’ और ‘दि स्टेट’ के बारे में बोलना वांछनीय समझा है। माननीय सदस्य इस भेद को संविधान के अनुच्छेद 12 में भी पायेंगे। वहाँ हम कहते हैं-
फ्नो लिटिल शैल बी कन्फर्ड बाई दि स्टेटय्
फ्नो सिटीजन ऑफ इण्डिया शैल एक्सेप्ट एनी टाइटिल फ्राम एनी फॉरेन स्टेटय्
यहाँ हम ‘दि स्टेट’ शब्दों का प्रयोग नहीं करते_ लेकिन पहले भाग में हम ‘दि स्टेट’ शब्दों का प्रयोग करते हैं। हम किसी भी प्रकार का प्राधिकार नहीं चाहते, चाहे वह केन्द्र का हो या राज्य का, जो किसी व्यक्ति को उपाधि प्रदान करता हो। इस भेद के होने से सदन अनुभव करेगा कि अनुच्छेद 28 मे ‘दि स्टेट’ शब्दों को बनाये रखना इस प्रचलन के अनुरूप है जो हमने इस संविधान के प्रारुप में अपनाया है।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं इन तीन संशोधनों को मतदान के लिए रखूँगा।
¹ श्रीमान् नज़ीरूद्दीन अहमद के सभी संशोधन अस्वीकृत हुए। अनुच्छेद 28 संविधान में जोड़ दिया गया।ह्
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ऽ सी.ए.डी., (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VII, 19 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 477-78