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¹अनुच्छेद 29 के सभी संशोधन अस्वीकृत हुए और अनुच्छेद को स्वीकार कर लिया गया।ह्
अनुच्छेद 30
ख्ऽ, श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद ः ........... महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ-
फ्कि अनुच्छेद 30 में से शब्द ‘स्ट्राइव टू’ निकाल दिया जाए।य्
[#] श्री एच.वी. कामथ - महोदय मैं संशोधन नं. 870 का प्रस्ताव करता हूँ-
फ्कि अनुच्छेद 30 में, शब्द ‘नेशनल लाइफ’ के प्हले आने वाले ‘दि’ को निकाल दिया जाए।य्
महोदय, पहले तो मैं इस संशोधन पर ध्यान देने के लिए अनिच्छुक था यह मानते हुए कि यह एक छोटी-सी बात है_ लेकिन किसी प्रकार शब्द ‘दि’ मुझे कर्णकटु लगा और अन्त में मैंने इसे निकालने का निर्णय कर लिया। मैं इतना घृष्ट नहीं हूँ कि मैं डॉ. अम्बेडकर या उनकी प्रारुप समिति के बुद्धिमान सहकर्मियों को भाषा के मामले में सलाह दूँ, लेकिन मैं आशा करता हूँ कि इस मामले में, शब्द ‘दि’ उनके कानों को भी उतना ही खटकता होगा जितना कि यह मेरे कानों को खटकता है, और श्रुतिमधुरता के नियमों का उल्लंघन करता है। इसलिए मैं उनसे इन्हें निकाल देने का आग्रह करता हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं संशोधन को स्वीकार करता हूँ।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः संशोधन संख्या 871 प्रस्तुत नहीं किया गया।
अब अनुच्छेद पर सामान्य चर्चा होगी।
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[$] श्री मोहन लाल गौतम ः क्या अब चर्चा समाप्त होने वाली है?
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैंने संशोधनों के पक्ष में और विपक्ष में चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया है।
श्री मोहन लाल गौतम ः क्या आप मुझे बोलने की अनुमति देंगे?
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मेरा मानना है कि हमारे पास चर्चा के लिए मात्र एक घंटे का उचित समय था और अब डॉ. अम्बेडकर को सदन को संबोधित करना चाहिए।
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ऽ # $ वही, पृष्ठ 487-88 सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक सी.ए.डी., (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VIIVII, 19 नवम्बर, 1948, पृ. 493, 19 नवम्बर, 1948, पृ. 487