अनुच्छेद 30-अ - Page 45

30 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ख्ऽ, श्री एल. कृष्णास्वामी भारती (मद्रास-जनरल) ः महोदय, श्रीमान् कामथ को अपना संशोधन वापस लेने के लिए सदस्य की अनुमति अवश्य ले लेनी चाहिए।

श्रीमान् हुसैन इमाम ः प्रस्तावक ने संशोधन स्वीकार कर लिया।

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः क्या सदन उन्हें वापस लेने की अनुमति देता है?

कई माननीय सदस्य ः हाँ।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारती ः मैं अनुमति दिये जाने पर आपत्ति करता हूँ।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः यदि वह वापस लेने चाहते हैं, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है_ उन्हें वापस लेने दें।

श्री एच.वी. कामथ ः सदन में इसके ऊपर कुछ विरोध है। एक माननीय सदस्य का सोचना है कि डॉ. अम्बेडकर ने इसे स्वीकार कर लिया है। मुझे नहीं मालूम कि उन्होंने स्वीकार कर लिया था। यदि उन्होंने स्वीकार कर लिया था तब वापस लेने का प्रश्न नहीं उठता।

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः क्या आप वापस लेना चाहते हैं?

श्री एच.वी. कामथ ः हाँ।

सभा की अनुमति से संशोधन वापस ले लिया गया।

अनुच्छेद 30 संविधान में जोड़ दिया गया।

अनुच्छेद 30-अ

[#] श्रीमान् उपाध्यक्ष (डॉ. एच.सी. मुखर्जी) ः ..... हम अब अनुच्छेद 30-अ पर फिर चर्चा शुरू करेंगे। क्या कोई सदस्य संशोधन नं. 872 पर बोलना चाहता है?

ऽ ऽ ऽ ऽ

ख्», माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बई - जनरल) ः महोदय, मैं नहीं समझ पाया हूँ कि वास्तव में यह क्या है, लेकिन यदि यह ऐसा मामला है जो निषेध से संबंधित है .............

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः हाँ।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर - तब यह मेरे और श्रीमान् त्यागी के बीच सहमति हो गयी है कि वह अनुच्छेद 38 में एक संशोधन का प्रस्ताव करेंगे और मैं उस स्वीकार करने का प्रस्ताव करता हूँ। इसलिए यह मामला तब तक के लिए स्थगित किया जा सकता है जब तक हम अनुच्छेद 38 पर विचारार्थ नहीं पहुँच जाते।

ऽ ऽ ऽ ऽ

ऽ # » सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक सी.ए.डी.,(आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VIIVIIVII, 19 नवम्बर, 1948, पृ. 501, 22 नवम्बर, 1948, पृ. 501, 19 नवम्बर, 1948, पृ. 495