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[#] श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं समझ नहीं पाया हूँ कि क्या यह संशोधन नं. 374 औपचारिक रूप से प्रस्तावित किया गया है?
श्री राजबहादुर ः मैंने इसे औपचारिक रूप से प्रस्तावित नहीं किया है। इस प्रश्न पर सदन का ध्यान आकर्षित करने के लिए मुझे अपनी राय जाहिर करनी है।
श्री एच.वी. कामथ (सी. पी. और बिहार - जनरल) ः ........ मैने डॉ. अम्बेडकर के प्रस्ताव पर जो कहा था उसे दोहराना नहीं चाहता। मैं केवल आशा व्यक्त करूँगा कि जहाँ अमरीका व यूरोप द्वारा अपनाये गये पूँजीवाद तथा संसदीय लोकतंत्र और सोवियत संघ द्वारा अपनाया गया केन्द्रीयकृत समाजवाद मानवता के लिए खुशहाली, शांति और समृद्धि लाने में विफल हो गया है, ऐसे में हम भारत में एक नया सामाजिक और आर्थिक नमूना तैयार कर महात्मा गांधी के पंचायती राज के सपने को साकार कर सकने में सक्षम होंगे, हम मानवता और विश्व को शांति और खुशहाली के लक्ष्य की ओर ले जाएंगे।
मैं, इसलिए आपकी अनुमति से, औपचारिक तौर पर इस संशोधन का प्रस्ताव करता हूँ और आपसे व्यक्तिगत निवेदन करता हूँ कि इसको तब तक रोके रखें जब तक इस अनुच्छेद के अन्य संशोधन चर्चा के लिए तैयार हो पाते हैं। मैं अपना संशोधन पढ़ता हूँ -
फ्कि अनुच्छेद 30 के बाद, अधोलिखित नये अनुच्छेद को अन्तर्विष्ट किया जाये-
‘30क-ग्राम पंचायतों को अन्तिम रूप से प्रशासन की आधारभूत इकाइयों के रूप में गठित करने के विचार के साथ, राज्य उनके स्वस्थ विकास को आगे बढ़ाने का प्रयत्न करेगा।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः क्या डॉ. अम्बेडकर इस संशोधन के विषय में कुछ कहना चाहते हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं प्रस्ताव करता हूँ कि यह मामला स्थगित किया जाए।
श्रीमान् उपाध्यक्ष - मैं पाता हूँ कि श्री के. सन्थानम के नाम से नया अनुच्छेद 31क जोड़ने के लिए एक संशोधन है जिसका नं. सूची में 927 है। यह और वह संशोधन साथ-साथ विचारार्थ लिए जा सकते हैं। क्या सदन की ऐसी इच्छा है कि ऐसा किया जाए?
ऽ ऽ ऽ ऽ
माननीय सदस्य ः हाँ।
अनुच्छेद 31
ख्ऽ, श्रीमान् उपाध्यक्ष ः सदन अब अनुच्छेद 31 को चर्चा के लिए लेगा।
श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद (पं. बंगाल - मुस्लिम) ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ-
# ऽ सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VIIVII, 22 नवम्बर, 1948, पृ. 487, 22 नवम्बर, 1948, पृ. 501