अनुच्छेद 31 - Page 47

32 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

फ्कि अनुच्छेद 31 की धारा ( i ) में, शब्दों ‘पुरुष और स्त्रियां समान रूप से’ को निकाल दिया जाए।य्

ऽ ऽ ऽ ऽ

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं संशोधन का विरोध करता हूँ।

ऽ ऽ ऽ ऽ

[#] श्री एस.वी. कृष्णामूर्ति राव (मैसूर) ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ-

फ्कि अनुच्छेद 31 की धारा ( v ) में, शब्दों ‘कि शक्ति और स्वास्थ्य’ के लिए शब्दों ‘कि स्वास्थ्य और शक्ति’ को प्रतिस्थापित किया जाए।य्

मेरा संशोधन केवल वाक्य-रचना को पुनः क्रमबद्ध करने के लिए है। मेरा स्पष्टीकरण केवल इतना है कि स्वास्थ्य के बाद शक्ति आती है और वाक्य-रचना अच्छी लगती है, महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ।

ऽ ऽ ऽ ऽ

ख्», श्री ब्रजेश्वर प्रसाद (बिहार - जनरल) ः महोदय क्या मैं बोल सकता हूँ?

श्रीमान् उपाध्यक्ष - मुझे खेद है। मैं समझता हूँ काफी चर्चा हो चुकी है। डॉ. अम्बेडकर।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान् उपाध्यक्ष, महोदय, इस विशेष अनुच्छेद के लिए प्रस्तावित बहुत से संशोधनों में से केवल चार विचार के लिए बचे हैं। मैं पहले श्रीमान् कृष्णामूर्ति राव का संशोधन लूँगा। यह केवल शाब्दिक है और साफ तौर पर कहता हूँ कि मैं इस संशोधन को स्वीकार करने के लिए पूर्णतया तैयार हूँ। उसके बाद प्रो. के. टी. शाह द्वारा प्रस्तावित तीन संशोधन शेष रहते हैं। उनका पहला संशोधन शब्दों ‘प्रत्येक नागरिक’ को शब्द ‘नागरिकों’ के लिए प्रतिस्थापित किया जाए। अब, यदि वह केवल इसी संशोधन का प्रस्ताव कर रहे होते तो मेरे लिए उनके संशोधन को स्वीकार करना कठिन नहीं होता। लेकिन वे शब्दों ‘पुरुष और स्त्रियां समान रूप से’ को हटाने का भी प्रस्ताव करते हैं जिस पर मुझे काफी आपत्ति है। इसलिए, मैं उनको कहूँगा कि वे इस विशेष संशोधन के लिए दबाव न डालें, इस भरोसे पर कि जब संविधान इस सदन में पारित हो जाता है और शाब्दिक परिवतनों के लिए यह प्रारुप समिति के विचारार्थ पुनः आता है, तो मैं उनकी भावनाओं का ख्याल रखने के लिए बिल्कुल तैयार रहूँगा क्योंकि मैं अच्छी तरह समझ सकता हूँ कि शब्द ‘प्रत्येक नागरिक’ शब्द ‘नागरिकों’ से बेहतर वाक्य-रचना है।

उनके अन्य संशोधनों के संबंध में, अर्थात ् अनुच्छेद 31 के उपखण्डों ( ii ) और ( iii ) के लिए उनके अपने खण्डों का प्रतिस्थापन, जो कुछ भी मैं कहना चाहता हूँ

# » वही, पृ. 518वही, पृ. 513