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वह यह है कि प्रो. शाह के संशोधन पर विचार करने के लिए मैं बिल्कुल तैयार होता यदि उन्होंने बताया होता कि ऐसा करने के पीछे उनका इरादा यह था और जैसी भाषा है उसके तहत यह सम्भव नहीं था। जहाँ तक मैं समझने मे सक्षम हूँ, मेरे विचार से इस प्रारुप में प्रयुक्त भाषा अधिक विस्तृत है जिसमें प्रो. शाह द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव भी शामिल है और इसलिए मैं इन विशेष प्रकार की सीमित धाराओं को उन धाराओं के लिए प्रतिस्थापित करने की आवश्यकता नहीं समझता जो किसी निश्चित उद ् देश्य के लिए सोच-समझकर सामान्य भाषा में प्रारुपित की गई हैं। इसलिए मैं उनके दूसरे और तीसरे संशोधन का विरोध करता हूँ।
ख्ऽ, श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं अब, एक के बाद एक, इन संशोधनों को मतदान के लिए रखूँगा।
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¹सभी आठ संशोधन अस्वीकृत हुए। एक छोड़ दिया गया। केवल एक संशोधन, श्रीमान् कृष्णामूर्ति राव का, स्वीकृत हुआ और उसे अपना लिया गया। अनुच्छेद 31 तदनुरूप संशोधित किया गया और संविधान में जोड़ दिया गया।ह्
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अनुच्छेद 31-क
[#] श्रीमान् उपाध्यक्ष ः श्रीमान् सन्धानम प्रस्ताव करें।
माननीय श्री के. सन्धानम ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ-
फ्कि अनुच्छेद 31 के बाद, अधोलिखित नया अनुच्छेद जोड़ा जाए-
‘31-क - राज्य ग्राम पंचायतों को संगठित करने के लिए कदम उठाएंगा और उन्हें ऐसी शक्तियां और प्राधिकार देगा जो उन्हें स्व-सरकार की इकाइयों की तरह कार्य करने के लिए सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हो सकते हैं’।य्
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं संशोधन स्वीकार करता हूँ।
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ख्ऽ, माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं संशोधन को स्वीकार करता हूँ, मेरे पास और कुछ कहने के लिए नहीं है।
¹एक माननीय सदस्य बोलने के लिए खड़े हुए।ह्
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः इस मामले में मेरा फैसला अंतिम है। मैंने अभी तक कोई ऐसा
ऽ #* वही, पृ. 527सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VII, VII, 22 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 518-1922 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 520