35
[♣] श्री एस. नागप्पा (मद्रास - जनरल) ः महोदय, मैं सदन का समय नहीं लेना चाहता। मैं केवल एक संशोधन करना चाहता हूँ कि शब्दों ‘सभी औद्योगिक कर्मकारों’ से पहले ‘खेतिहर’ शब्द को जोड़ा जा सकता है। महोदय, मुझे कहने की आवश्यकता नहीं कि अधिकरत काम करने वाली जनसंख्या खेतिहर मजदूरों की है।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः यह ठीक क्रम में नहीं है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान् उपाध्यक्ष महोदय, अधिकतर सदस्यों की भावना है कि निदेशात्मक सिद्धांतों में कुटीर उद्योगों का संदर्भ होना चाहिए। इस सदन के सदस्यों की इच्छाओं को प्रभावी बनाने के लिए अनुच्छेद 34 में कुछ शब्दों को अन्तर्विष्ट करने के लिए मैं सिद्धांततः सहमत हूँ। इसलिए मैं श्रीमान् रामलिंगम चेट्टियार द्वारा प्रस्तावित संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ यदि इसमें एक या दो शब्द प्रतिस्थापित किए जाते हैं। एक प्रतिस्थापन जो मैं करना चाहूँगा वह यह है, शब्दों ‘ग्रामीण क्षेत्रों में’ के बाद ‘वैयक्तिक या’ शब्दों को जोड़ना चाहूँगा। मैं उनके शब्दों ‘की तर्ज पर’ को ‘के आधार पर’ शब्दों से प्रतिस्थापित करना चाहूँगा। इसलिए संशोधन इस रूप में होने चाहिए-
फ्और विशेषकर राज्य ग्रामीण क्षेत्रों में वैयक्तिक या सहकारिता के आधार पर कुटीर उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करेगा।य्
इससे, मेरे विचार में, दन अधिकतर सदस्यों की इच्छायें पूरी हो जाएंगी जिनकी विशेष रूप से इस विषय में रुचि है।
मैं यह भी कहता हूँ कि मैं श्रीमान् नागप्पा द्वारा प्रस्तावित संशोधन को स्वीकार करने के लिए पूर्णतया तैयार हूँ कि ‘खेतिहर’ शब्द ‘औद्योगिक के पहले जोड़ा जाए।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः इसकी अनुमति नहीं थी।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी यदि आप इसकी अनुमति देते हैं। मेरे विचार से श्रीमान् नागप्पा का सुझाव कि खेतिहर श्रम उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि औद्योगिक श्रम और इसके लिए केवल ‘अन्यथा’ शब्द का संदर्भ नहीं देना चाहिए, अर्थपूर्ण है। फिर भी यह फैसले किए जाने का मामला है और इस पर आपको निर्णय लेना है।
श्री टी. रामलिंगम चेट्टियार ः मैं डॉ. अम्बेडकर के संशोधनों को स्वीकार करता हूँ।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारती (मद्रास - जनरल) ः महोदय, क्या मैं सुझाव दे सकता हूँ कि हमें कुटीर उद्योगों पर ही रूक जाना चाहिए और शेष को निकाल देना चाहिए। आप शब्दों ‘वैयक्तिक या सहकारिता के आधार पर’ को क्यों चाहते हैं? इन शब्दों को जोड़ने से कोई लाभ नहीं है जब तक कि आप सहकारिता के आधार पर विशेष बल नहीं देना चाहते। मैं शब्दों ‘वैयक्तिक या सहकारिता के आधार पर’ को निकालना चाहूँगा।
♣ सी.ए.डी., (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VII, 22 नवम्बर, 1948, पृ. 534-35