36 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, क्या मैं स्पष्ट कर सकता हूँ? मैं उन सदस्यों में जो रुचि ले रहे हैं, दो भेद पाता हूँ- पहले प्रकार के सदस्य केवल सहकारिता पर आधारित कुटीर उद्योगों में विश्वास करते हैं_ दूसरे प्रकार के सदस्य विश्वास करते हैं कि कुटीर उद्योगों को इस प्रकार सीमाओं में नहीं बाँधना चाहिए। दोनों पक्षों को संतुष्ट करने के लिए ही मैंने इस वाक्य-रचना का जानबूझकर प्रयोग किया है जो मुझे यकीन है, दोनों प्रकार के विचारों को संतुष्ट करेगी जो व्यक्त किए गये हैं।
श्री एम. अनन्याशयनम आयंगर (मद्रास - जनरल) ः मैं नहीं बोलना चाहता।
श्रीमान् उपाध्यक्ष - मेरे विचार में, कि यह सव आत्मनिर्भरता के आधार पर किया जायेगा। मैं अपने संशोधन में डॉ. अम्बेडकर द्वारा अंतिम तौर पर प्रस्तावित किए गये संशोधन को स्वीकार करता हूँ और उस स्थिति में मुझे अपना संशोधन वापस लेना पड़ेगा।
सभा की अनुमति से, संशोधन वापस ले लिया गया।
श्री अमियो कुमार घोष ः महोदय, मैं जानना चाहता हूँ कि ‘खेतिहर मजदूर’ शामिल कर लिया गया है या नहीं।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः यह शामिल नहीं किया गया है लेकिन मैं अपने फैसले से हटने के लिए तैयार हूँ बशर्ते किसी असहमति के बिना, सदन डॉ. अम्बेडकर का सुझाव स्वीकार कर ले।
माननीय सदस्य ः हाँ।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः तब मैं श्री रामालिंगम के संशोधन को जैसा डॉ. अम्बेडकर द्वारा संशोधित किया गया है मतदान के लिए रखता हूँ।
संशोधन यथा संशाधित रूप में स्वीकृत हुआ।
संशोधन जैसा अपने श्रीमान् नागप्पा द्वारा प्रस्तुत संशोधन को यथा रूप में स्वीकार कर लिया गया।
अनुच्छेद 34 यथासंशोधित रूप में संविधान मे जोड़ दिया गया।
अनुच्छेद 35
ख्ऽ, श्रीमान् उपाध्यक्ष ः अब हम अनुच्छेद 35 पर आते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं आपसे इस अनुच्छेद को अभी स्थगित करने की अनुमति के लिए निवेदन करता हूँ।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः इस अनुच्छेद को बाद में विचार के लिए स्थगित किया जाता है। क्या सदन को यह मान्य है?
माननीय सदस्य - हाँ।
ऽ सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VII, 23 नवम्बर, 1948, पृ. 538