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अनुच्छेद 36
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रा (पं. बंगाल - जनरल) ः श्रीमान् उपाध्यक्ष, महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ-
फ्कि अनुच्छेद 36 में, शब्दों ‘प्रत्येक नागरिक मुफत प्राथमिक शिक्षा का अधिकार है और’ को निकाल दिया जाए।य्
महोदय, मैं आपके द्वारा भाषणों को छोटा करने के संबंध में दिये गये आदेशा का दृढ़ता से पालन करूँगा। इस संशोधन का उद ् देश्य स्पष्ट करने के लिए मैं आधा दर्जन ही वाक्य बोलूँगा। यदि यह संशोधन सदन द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, जैसी मुझे उम्मीद है कि यह कर लिया जाएगा, तब यह अनुच्छेद इस प्रकार होगा-
फ्कि राज्य इस संविधान के शुरु होने के दस वर्ष के अन्तराल में सभी बच्चों के लिए तब तक मुफत और आवश्यक शिक्षा की व्यवस्था करने का प्रयास करेगा जब तक कि वे चौदह वर्ष की उम्र पूरी नहीं कर लेते।य्
ऽ ऽ ऽ ऽ
श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद (पं. बंगाल - मुसलमान) ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ-
फ्कि अनुच्छेद 36 में, ‘शिक्षा’ शब्द के स्थान पर शब्दों ‘प्राथमिक शिक्षा’ को प्रतिस्थापित किया जाए।य्
ऽ ऽ ऽ ऽ
ख्ऽ, माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं अपने मित्र श्रीमान् मैत्रा द्वारा प्रस्तावित संशोधन को स्वीकार करता हूँ जो यह सुझाव देता है कि शब्दों ‘प्रत्येक नागरिक मुफत प्राथमिक शिक्षा का अधिकारी है और’ को निकाल दिया जाए। लेकिन मैं अपने मित्र श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद के संशोधनों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हूँ। वह ऐसा सोचते हुए प्रतीत होते हैं कि अनुच्छेद 36 में शेष धारा का उद ् देश्य मुफत प्राथमिक शिक्षा तक सीमित है। लेकिन ऐसा नहीं है। संशोधन के बाद धारा इस प्रकार है कि प्रत्येक बच्चे को प्रशिक्षण हेतु शैक्षणिक संस्थान में तब तक रखा जाएगा जब तक कि वह बच्चा चौदह वर्ष का नहीं हो जाता। यदि मेरे मित्र नज़ीरुद्दीन अहमद ने अनच्छेद 18 को देखा होता जो मूलाधिकारों का भाग है तो उन्हें पता चल जाता कि अनुच्छेद 18 में एक प्रावधान किया गया है कि चौदह वर्ष से कम उम्र के किसी बच्चे को काम में लगाना मना है। स्पष्ट है कि यदि चौदह वर्ष से कम उम्र वाले बच्चे को काम में नहीं लगाना है तो उसे किसी शैक्षणिक संस्थान में रखा जाना आवश्यक है। यही अनुच्छेद 36 का उद ् देश्य है और इसीलिए मैं कहता हूँ कि इस विशेष धारा में ‘प्राथमिक’ शब्द बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है और इसलिए मैं उनके संशोधन का विरोध करता हूँ।
ऽ सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VII, 23 नवम्बर, 1948, पृ. 538