अनुच्छेद 35 - Page 53

38 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

¹पं. मैत्रा का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। नज़ीरुद्दीन अहमद का प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ।ह्

अनुच्छेद 36, यथा संशोधित रूप में संविधान में जोड़ दिया गया।

अनुच्छेद 35

ख्ऽऽ, श्रीमान् मोहम्मद इस्माइल साहिब (मद्रास - मुस्लिम) ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ कि अधोलिखित प्रतिबंध को अनुच्छेद 35 में जोड़ा जाए-

फ्बशर्ते कि लोगों के किसी समूह, भाग या समुदाय का यदि कोई व्यक्तिगत कानून है तो वह उस कानून को त्यागने के लिए बाध्य नहीं होगा।य्

ऽ ऽ ऽ ऽ

[# ] माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मुझे डर है मैं इस अनुच्छेद के लिए प्रस्तावित किए गये संशोधनों को स्वीकार नहीं कर सकता। इस मामले पर विचार करने में, मैं इस प्रश्न के गुण-दोष को छूने का प्रस्ताव नहीं करता कि इस देश में नागरिक संहिता होनी चाहिए या नहीं। यह ऐसा मामला है जिस पर, मेरे विचार से मेरे मित्र श्रीमान् मुंशी तथा श्रीमान् अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर द्वारा पर्याप्त रूप से विचार किया जा चुका है। जब कुछ निश्चित मूलाधिकारों में संशोधन प्रस्तावित किए जाएंगे तब मेरे लिए इस विषय पर पूरी बात कहना सम्भव होगा और इसलिए मैं इस पर यहाँ विचार करने का प्रस्ताव नहीं कर रहा।

मेरे मित्र, श्रीमान् हुसैन इमाम ने संशोधनों के समर्थन में पूछा था कि क्या इतने विशाल देश में कानूनों की एक समान संहिता और वांछनीय है? अब मुझे यह कहने में कोइ हिचक नहीं है कि मैं इन कथनों पर बहुत अधिक आश्चर्यचकित हुआ था। इसका सीधा सा कारण है कि इस देश में मानवीय संबंधों के प्रत्येक पहलू को शामिल करने वाले कानूनों की एक समान संहिता है। हमारे पास एक पूर्ण और समान संहिता है जो पूरे देश में प्रचलित में है और जो दंड संहिता तथा आपराधिक प्रक्रिया संहिता में अन्तर्विष्ट है। हमारे पास सम्पति हस्तांतरण कानून है जो सम्पति संबंधों से संबंधित है और जो पूरे देश में लागू है। उसके बाद विक्रय हुंडी अधिनियम है और मैं अधिसंख्य कानूनों का हवाला दे सकता हूँ जो यह सिद्ध कर देंगे कि इस देश में वास्तव में एक नागरिक संहिता है जो विषयों में समान है और पूरे देश में लागू है। नागरिक कानून एकमात्र जिस क्षेत्र में अभी तक प्रवेश नहीं कर सका है वह है विवाह और उत्तराधिकार। और यही वह छोटा-सा क्षेत्र है जिसमें हम अभी तक प्रवेश नहीं कर पाए हैं, जो अनुच्छेद 35 को संविधान का हिस्सा बनाने के इच्छुक हैं उन लोगों का यह परिवर्तन लाने का इरादा है। इसलिए यह तर्क कि क्या हमें ऐसा करने का प्रयत्न करना चाहिए, यहाँ मुझे कुछ अनुचित प्रतीत होता है और इसकी सीधी वजह है कि सच्चाई के तौर पर हमने

ऽऽ # वही, 23 नवम्बर, 1948 पृ. 550 सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VII, 23 नवम्बर, 1948, पृ. 540