41
वह सिख नहीं है। इस प्रकार के मामलों से इस आम धारणा के कारण और असंतोष पैदा हुआ है कि कुछ वर्गों के विरुद्ध भेदभाव बरता जा रहा है।
अब विचार सामाज के पिछड़े वर्ग को ऊँचा उठाने का है ताकि वे राष्ट्रीय गतिविधियों में समान योगदान देने मे सक्षम हो सकें। मैं इस विचार को पूरा समर्थन देता हूँ। मुझे एक तर्क का सामना करना पड़ सकता है कि कम से कम अनुच्छेद का पहला भाग है जो कमजोर वर्गों के लोगों के शैक्षणिक और आर्थिक हितों को बढ़ाने का प्रावधान करता है। यह बिल्कुल सही है और यह प्रत्येक वर्ग पर लागू किया जा सकता है। लेकिन चूंँकि फ्कमजोर वर्गय् कहीं भी परिभाषित नहीं किया गया है इसलिए अंदेशा यही है कि पूरा का पूरा ध्यान बाद के हिस्से जो अनुसूचित जाति से संबंधित है पर जायेगा और ‘कमजोर वर्गों’ का और कुछ अर्थ नहीं हो सकता। अनुच्छेद भी ‘विशेषकर’ शब्द द्वारा पूरा का पूरा बल इस बाद के हिस्से पर देता है जो ‘अनुसूचित जाति’ है।
इस संबंध में मुझे गलत नहीं समझा जा सकता। राज्य की ‘अनुसूचित जातियों’ के प्रति विशेष परवाह से मुझे ईर्ष्या नहीं है। अपेक्षाकृत मैं पिछड़े वर्गों को और भी अघिक रियायतें दिये जाने का समर्थन करूँगा। मेरा एक मात्र उद ् देश्य है कि कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए और अनुच्छेद का ऐसा इरादा भी नहीं है। लेकिन जैसा कि मैं कह चुका हूँ जहाँ तक आम लोग ‘अनुसूचित जातियों’ के बारे में समझते हैं वे सिख धर्म को मानने वाली इन्हीं जातियों को इनके बाहर कर देते हैं। हमें उन लोगों के द्वारा किसी गलत अर्थ लगाये जाने या किसी प्रकार का भेदभाव बरते जाने के विरुद्ध आश्वासन देने के लिए सावधान रहना चाहिए जो इसके वास्तविक कार्य संचालन के लिए उत्तरदायी होंगे। प्रस्तुत अनुच्छेद के तहत, फ्शैक्षणिक और आर्थिक हितोंय् को आगे बढ़ाया जाना है और इसलिए यह स्पष्ट कर दिया जाना चाहिए कि यह सभी पिछड़े वर्गों के लिए किया जाना है न कि किसी विशेष धर्म को मानने वाले लोगों के लिए। मैं यह प्रस्ताव सदन की स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करता हूँ।
श्री ए.वी. ठक्कर (संयुक्त राज्य काठियावाड़ - सौराष्ट्र) ः महोदय, मैं संशोधन नम्बर 983 का प्रस्ताव करता हूँ जो हिन्दुओं और मुस्लिम पिछड़ी जातियों को शामिल करने की माँग करता है ........
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः क्या मैं एक बात कह सकता हूँ? मेरा विश्वास है कि पिछड़े वर्गों आदि से संबंधित ये दोनों संशोधन अनुसूची के लिए अधिक उपयुक्त होंगे और इन पर अच्छी तरह विचार किया जा सकता है जब हम अनुसूची पर विचार करेंगे। मैं सुझाव देता हूँ कि इन संशोधनों पर विचार-विमर्श स्थगित किया जा सकता है।
श्री ए.वी. ठक्कर ः मेरे संशोधन कुछ सिद्धांतों को निर्धारित करने का प्रयत्न करते हैं।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः डॉ. अम्बेडकर इन संशोधनों पर हर संभव विचार अनुसूची में करने का प्रस्ताव करते हैं।