अनुच्छेद 38 - Page 57

42 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री ए.वी. ठक्कर ः क्या वह सभी पिछड़े वर्गों को शामिल करने के लिए सहमत हैं?

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः अब यह मुश्किल से ही किसी बात के लिए सहमत हो सकते हैं। मामले पर बाद में चर्चा होगी।

श्री ए.वी. ठक्कर ः तब मैं अपने संशोधन का अभी प्रस्ताव नहीं करता।

श्रीमान् नज़ीरुद्दीन अहमद ः महोदय, मैं अपना संशोधन (985) प्रस्तावित नहीं कर रहा हूँ। यह अनुसूचित जनजाति के मामले में केवल बड़े अक्षरों को प्रयोग करने का प्रयत्न करता है। मैं प्रारुप समिति के अध्यक्ष का ध्यान आदरसहित प्रारुप संविधान के पृष्ठ 147 पर अनुच्छेद 303(1) के विषय ( w )और ( x ) की ओर आकृष्ट करना चाहूँगा। वहाँ दो परिभाषाएं हैं ‘अनुसूचित जाति’ और ‘अनुसूचित जनजाति’। ‘अनुसूचित जाति’ तो हर जगह बड़े अक्षरों में है लेकिन ‘अनुसूचित जनजाति’ छोटे अक्षरों में है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः हम इस पर विचार करेंगे।

सरदार हुकुम सिंह ः मैं अपना संशोधन वापस लेने की अनुमति चाहता हूँ।

सभा की अनुमति से, संशोधन वापस लिया गया।

ऽ ऽ ऽ ऽ

अनुच्छेद 37 संविधान में जोड़ दिया गया।

अनुच्छेद 38

ख्ऽ, श्रीमान् उपाध्यक्ष ः हम आज की कार्यवाही प्रारुप संविधान के उस विशेष अनुच्छेद पर विचार से शुरू करेंगे जिससे हम संबद्ध हैं। विधेयक को थोड़ी देर के बाद प्रस्तुत किया जाएगा।

प्रो. शिब्बनलाल सक्सेना (संयुक्त प्रांत - जनरल) ः मैं एक संशोधन रख रहा हूँ जो श्रीमान् महावीर त्यागी का है। मैं उम्मीद करता हूँ कि यह उनको स्वीकार्य होगा, क्योंकि उन्होंने अपने संशोधन में ‘औषधीय उद ् देश्यों के अतिरिक्त’ शब्दों को शामिल नहीं किया है। यदि श्रीमान् त्यागी का संशोधन, जैसा मेरे संशोधन द्वारा संशोधित किया गया है, स्वीकार कर लिया जाता है तो यह बहुत अच्छा हो जाएगा। मैं डॉ. अम्बेडकर से अपनी इच्छा प्रकट करता हूँ कि वह मेरे संशोधन को स्वीकार कर लें जो सूची IV के 86 नम्बर में उल्लिखित है।

महोदय, मैं प्रस्ताव करने की प्रार्थना करता हूँ-

फ्कि अनुच्छेद 38 के अन्त में, अधोलिखित को प्रतिस्थापित किया जाय-

‘और उन नशीले पेय और मादक द्रव्यों के उपयोग पर निषेध लाने के लिए प्रयास करेगा जो औषधीय उद ् देश्यो के अतिरिक्त स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।य्

ऽ सी.ए.डी. (आधिकारिक प्रतिवेदन), अंक VII, 24 नवम्बर, 1948, पृ. 555