अनुच्छेद 38 - Page 59

44 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

संबंधित कानून का विशेष उल्लेख किया गया है। मैं अब पैरा 12 को उप-पैरा (अ) पढ़ूँगा जो प्रारुप संविधान में पृष्ठ 184 पर है। यह कहता है ---

फ्इस संविधान में निहित किसी बात के बावजूद-

(क) इस अनुसूची के पैरा 3 में उल्लिखित ऐसे मामलों में से किसी एक के संबंध में जिसके संबंध में जिला परिषद कानून बना सकती है राज्य का कोई अधिनियम, और किसी अनावसित मादक द्रव के सेवन पर प्रतिबंध लगाने वाले राज्य का कोई अधिनियम स्वायत्त क्षेत्र पर लागू नहीं होगा जब तक कि दोनों मामलों में इस जिले के लिए जिला परिषद या जिसका इस क्षेत्र पर न्यायाधिकार है सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा इस तरह का निदेश नहीं देता और किसी अधिनियम के संबंध में इस तरह का निदेश देते हुए जिला परिषद यह निदेश दे सकती है कि अधिनियम इस प्रकार के जिलो या क्षेत्र में या इसके किसी हिस्से में अपनी प्रयुक्ति में इस प्रकार के अपवादों और सुधारों जिनको यह उचित समझती है कि अधीन प्रभावी होगा_

अब मुझे नहीं पता मेरे मित्र श्रीमान् जयपाल सिंह छठी अनुसूची के पैरा 12 के इस प्रावधान से अधिक क्या चाहते हैं। मेरा डर यह है कि उन्होंने छठी अनुसूची नहीं पढ़ी है- यदि उन्होंने पढ़ी होती तो उन्हें अहसा हो चुका होता कि राज्य निषेध संबंधी अपने कानून को देश के किसी भी हिस्से में लागू कर सकता है तो भी राज्य को इसे जिला परिषदों या क्षेत्रीय परिषदों की स्वीकृति के बिना जनजातीय क्षेत्रों में लागू करने का कोई अधिकार नहीं है।

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः तीन संशोधन हैं। एक श्रीमान् महावीर त्यागी का है। यह सूची II में 71 नम्बर पर है। यदि मैं सही स्थिति बयान करता हूँ जो वास्तव में वापस ले ली गई है। क्या मैं सही हूँ, श्रीमान् त्यागी?

श्री महावीर त्यागी ः मैंने अपना संशोधन वापस नहीं लिया है। मैने केवल उन शब्दों को स्वीकार किया है जिन्हें प्रो. शिब्बनलाता सक्सेना ने अपने संशोधन के द्वारा जोड़ने का इरादा किया है।

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं जानना चाहता हूँ कि क्या आप चाहते हैं कि आपका संशोधन मतदान के लिए अलग से रखा जाना चाहिए।

श्री महावीर त्यागी ः हाँ, महोदय, यकीनन। जैसा मैं कह चुका हूँ मैं ‘द्रव’ को पूर्णतया समाप्त करना चाहता हूँ। वह ‘औषधीय उद ् देश्य के अतिरिक्त’ शब्दों को जोड़ना चाहते हैं। इसलिए मेरा संशोधन मूल संशोधन है।

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं स्थिति समझता हूँ। मैं अब श्री महावीर त्यागी का संशोधन जैसा प्रो. शिब्बनलाल सक्सेना द्वारा और आगे डॉ. अम्बेडकर द्वारा संशोधित किया गया, मतदान के लिए रखता हूँ।