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श्री महावीर त्यागी ः एक नियम संबंधी आपत्ति पर, डॉ. अम्बेडकर ने ‘विशेषकर‘ शब्द जोड़ा है लेकिन उन्होंने मुझसे अनुमति नहीं ली है।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः डॉ. अम्बेडकर की ओर से मैं आपसे अनुमति लेता हूँ।
श्री महावीर त्यागी ः महोदय, मैं भी उनका संशोधन स्वीकार करता हूँ।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः यह विशेष संशोधन, जैसा संशोधित किया गया है अब मतदान के लिए रखा जाता है।
संशोधन स्वीकृत हुआ।
¹अनुच्छेद 38, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ दिया गया।ह्
ऽ ऽ ऽ ऽ
अनुच्छेद 38-क
ख्ऽ, पंडित ठाकुरदास भार्गव (पूर्वी पंजाब - जनरल) ः [#] श्रीमान् अध्यक्ष, संशोधन संख्या 72, जिसका मैं संशोधन संख्या 1002 के स्थान पर प्रस्ताव कर रहा हूँ, के शब्द इस प्रकार हैं-
फ्कि 38-क. के संशोधनों की सूची के संशोधन नम्बर 1002 के लिए अधोलिखित को प्रतिस्थापित किया जाए --
फ्38-क, राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से संगठित करने का प्रयास करेगा और विशेषकर पशुओं की किस्मों को संरक्षित रखने और बेहतर बनाने के लिए कदम उठायेगा तथा गाय और अन्य उपयोगी पशुओं विशेषकर दूध देने वाले और भारवाही पशु तथा उनके बच्चों की हत्या को निषिद्ध करने का प्रयास करेगा।य्
बिल्कुल आरंभ में मैं यह कहना चाहूँगा कि यह संशोधन ........
श्री एस. नागप्पा (मद्रास - जनरल) ः महोदय, मैं नियम संबंधी आपत्ति कर रहा हूँ, मेरे मित्र जो अच्छी तरह अंग्रजी बोल सकते हैं, जानबूझकर उर्दू या हिन्दुस्तानी में बात कर रहे हैं जो अधिकतर दक्षिण भारतीय समझ नहीं सकते।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः माननीय सदस्य को, किसी भी भाषा में, जिसमें उनकी इच्छा हो, बोलने का अधिकार है लेकिन मैं उनसे अंग्रजी में बोलने का अनुरोध करता हूँ हालांकि वह अंग्रजी में बोलने के लिए बाध्य नहीं है।
पंडित ठाकुरदास भार्गव ः मैं गाय के बारे में हिन्दी में बोलना चाहता था जो मेरी अपनी भाषा है और मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि मुझे अंग्रजी में बोलने का आदेश न दें क्योंकि विषय बहुत ही महत्वपूर्ण है। मैं अपनी बात उस भाषा में कहूँगा जिसमें मुझे
ऽ # सी.ए.डी., अंक हिन्दुस्तानी भाषण का अनुवाद। VII, 24 नवम्बर, 1948, पृ. 568