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प्रो. शिब्बनलाल सक्सेना ः मुझे प्रसन्नता है कि डॉ. अम्बेडकर इसे स्वीकार करने जा रहे हैं। क्योंकि यह अनुच्छेद एक निदेशात्मक सिद्धांत है इसलिए इसे संसद के कानूनों का उल्लेख नहीं करना चाहिए और इसलिए हमें शब्दों फ्संसद द्वारा बनाये गये कानून के अनुसार इस प्रकार के सभी स्मारकों या स्थानों या वस्तुओं को संरक्षित रखना तथा बनाये रखनाय् को अवश्य निकाल देना चाहिए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं संशोधन को स्वीकार करता हूँ।
ऽ ऽ ऽ ऽ
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं एक के बाद एक, इन संशोधनों को मतदान के लिए रख रहा हूँ।
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः यह प्रो. शिब्बनलाल सक्सेना का संशोधन है।
बेगम ऐज़ाज रसूल (संयुक्त प्रांत - मुसलमान) ः क्या मैं जान सकती हूँ कि क्या डॉ. अम्बेडकर ने प्रो. शिब्बनलाल सक्सेना का संशोधन स्वीकार कर लिया है? यदि नहीं, तो मैं दूसरे भाग का विरोध चाहती हूँ।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः जहाँ तक मुझे जानकारी है कोई दूसरा भाग नहीं है। यह मात्र कुछ शब्दों को निकालने के लिए है। पहला भाग यही है।
बेगम ऐज़ाज रसूल ः मैं इस प्रस्ताव का विरोध करना चाहती हूँ।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं समझता हूँ कि अब बहुत देर हो चुकी है।
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।
अनुच्छेद 39, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ दिया गया।
अनुच्छेद 39-क
ख्ऽ, माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान् उपाध्यक्ष, महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ-
फ्कि अनुच्छेद 39 के बाद, अधोलिखित नया अनुच्छेद अन्तर्विष्ट किया जाए -
‘39-अ. कि राज्य अपनी सार्वजनिक सेवाओं में इस संविधान के शुरू होने के तीन वर्ष के अन्तराल के अन्दर यह सुनिश्चित करने के लिए कि कार्यपालिका से न्यायपालिका अलग है, कदम उठायेगा’।य्
मैं नहीं सोचता कि मेरे लिए संशोधन जिसका मैंने प्रस्ताव किया है, के समर्थन में कोई लम्बा चौड़ा वक्तव्य देने की आवश्यकता है। बहुत समय से इस देश की यह इच्छा रही है और ठीक उस समय से इसकी मांग चलती रही है जब कांग्रेस की नींव पड़ी
ऽ सी.ए.डी., अंक VII, 24 नवम्बर, 1948, पृ. 582