50 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ख्ऽ, श्रीमान् मोहम्मद ताहिर (बिहार - मुस्लिम) ः श्रीमान् उपाध्यक्ष, महोदय, मैं प्रस्ताव करने की प्रार्थना करता हूँ- कि अनुच्छेद 39 के बाद अधोलिखित नये अनुच्छेद को सन्निविष्ट किया जाए और शेष अनुच्छेदों को पुनः संख्या दी जाए।
फ्40. पूजा स्थलों जैसे - गुरूद्वारों, चर्चों, मंदिरों, मस्जिदों और कब्रिस्तानों तथा शमशान घाटों की सुरक्षा करना तथा इन्हें बचाकर रखना राज्य का कर्त्तव्य होगा।य्
ऽ ऽ ऽ ऽ
[# ] माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं संशोधन स्वीकार नहीं करता।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं अब संशोधन को मतदान के लिए रखूँगा।
संशोधन अस्वीकृत हुआ।
अनुच्छेद 40
ख्», श्रीमान् उपाध्यक्ष - 1018 नम्बर। डॉ. अम्बेडकर।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर - मैं समझता हूँ श्रीमान् कामथ एक संशोधन प्रस्तावित कर रहे हैं।
श्री एच.वी. कामथ - मैं अपना संशोधन डॉ. अम्बेडकर के संशोधन के बाद प्रस्तावित करूँगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ- फ्कि विद्यमान अनुच्छेर 40 के स्थान पर, अधोलिखित को प्रतिस्थापित किया जाए-
फ्40. राज्य
(क) अंतराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देगा_
(ख) राष्ट्रों के बीच उचित और सम्माननीय संबंधों को बनाये रखने का प्रयत्न
करेगा, और
(ग) संगठित लोगों के एक दूसरे से व्यवहार करने में अंतराष्ट्रीय कानून और संधि
कर्त्तव्यों के प्रति सम्मान बनाये रखने के लिए प्रयास करेगा।य्
महोदय, यह संशोधन मूल अनुच्छेद 40 को केवल सरल बना देता है और इसे कुछ भागों में, प्रत्येक विचार को अलग करते हुए विभाजित कर देता है ताकि जो कोई भी इस अनुच्छेद को पढ़े उसे स्पष्ट और पूरी तरह समझ मे आ जाए कि अनुच्छेद 40 में वास्तव में क्या कहा गया है? इस नये अनुच्छेद में निहित सिद्धांत इतने सरल हैं कि इन्हें समझाने के लिए लम्बे भाषण की आवश्यकता नहीं है।
ऽ # » सी.ए.डी., अंक वही, पृष्ठ 595वही, पृष्ठ 594 VII, 25 नवम्बर, 1948, पृ. 593