अनुच्छेद 40 - Page 66

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महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ।

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः इस अनुच्छेद के प्रति कुछ संशोधन हैं जिन्हें मैं पुकार रहा हूँ। संख्या 74 श्रीमान् सरवटे।

श्री वी.एस. सरवटे (ग्वालियर-इन्दौर-मघ्य भारत के संयुक्त राज्य) ः श्रीमान् उपाध्यक्ष महोदय, मैं इस संशोधन में एक और संशोधन करने का प्रस्ताव करता हूँ। मेरा संशोधन इस प्रकार है-

फ्कि अनुच्छेद 40 में संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 1018 में, शब्द ‘राज्य’ के बाद और उपखण्ड (अ) के पहले यह नयी धारा अन्तर्विष्ट की जाए और विद्यमान धारा को उसी के अनुसार पुनः संख्या दी जाए --

(अ) नागरिकों में सच्चाई, न्याय और कर्त्तव्य बोध को प्रोत्साहित करेगा।य्

ऽ ऽ ऽ ऽ

ख्ऽ, श्री एच.वी. कामथ ः महोदय मैं प्रस्ताव करता हूँ-

फ्कि अनुच्छेद 40 में संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 1018 में, धारा (क) में ‘देगा’ के स्थान पर ‘देने का’ प्रतिस्थापित किया जाए, (ख) में ‘प्रयत्न करेगा’, और शब्दों को निकाल दिया जाए और (ग) में शब्दों ‘बनाये रखने के लिए प्रयास करेगा’ को ‘विकसित करने का, और’ शब्दों से प्रतिस्थापित किया जाए।य्

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः प्रश्न यह है कि विद्यमान अनुच्छेद 40 के लिए अधोलिखित को प्रतिस्थापित किया जाए -

ताकि यदि यह संशोधन सदन द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है तो प्राःप समिति का संशोधन इस प्रकार पढ़ा जाएगाः-

फ्40, राज्य-

(क) अंतराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का_

(ख) राष्ट्रों के बीच सम्माननीय और उचित संबंधों को बनाये रखने का_

(ग) संगठित लोगों के एक-दूसरे से व्यवहार करने में अंतर्राष्ट्रीय कानून और संधि

कर्त्तव्यों के प्रति सम्मान विकसित करने का_ और

(घ) मध्यस्थता द्वारा अंतराष्ट्रीय विवादों के निपटारे को बढ़ावा देने का प्रयास

करेगा।य्

यह संशोधन डॉ. अम्बेडकर द्वारा लाये गये संशोधन में थोड़ा सा संरचनात्मक परिवर्तन का प्रयत्न करता है ताकि अनुच्छेद 40 में निहित सिद्धांत के निदेशात्मक गुण को स्पष्ट किया जा सके या इस गुण की ओर संकेत किया जा सके ........

ऽ ऽ ऽ ऽ

ऽ सी.ए.डी., अंक VII, 25 नवम्बर, 1948, पृ. 596