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52 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

[#] श्रीमान् उपाध्यक्ष ः श्रीमान् आयंगर, क्या आप इसे औपचारिक तरीके से प्रस्तावित करेंगे?

श्री एम. अनन्तसयनम आयंगर ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर के संशोधन के अंत में, अधोलिखित धारा जोड़ दें-

फ्और (द) मध्यस्थता द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विवादों के निपटारे को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।य्

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।

ख्», माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं श्रीमान् कामथ के तीनों संशोधन स्वीकार करता हूँ। मै डॉ. सुब्बाराव को संशोधन स्वीकार करता हूँ और मैं अपने माननीय मित्र श्रीमान् अनन्यासयनम आयंगर द्वारा प्रस्तावित संशोधन स्वीकार करता हूँ। मैं कोई अन्य संशोधन स्वीकार नहीं करता।

प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ।

अनुच्छेद 7

ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ-

फ्कि अनुच्छेद 7 के अंत में अधोलिखित शब्दों को जोड़ा जाए-

‘या भारत सरकार के नियंत्रण के अधीन।य्

महोदय, यह संशोधन इसलिए आवश्यक समझा गया क्योंकि ऐसे क्षेत्रों के अलावा जो भारत के हिस्से हैं ऐसे भी अन्य क्षेत्र हो सकते हैं जो भारत के हिस्से न हों लेकिन, फिर भी, भारत सरकार के नियंत्रण में हों। अब अंतर्राष्ट्रीय मसलों में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहाँ क्षेत्र, अधिदेश या फिर न्यासिता के तहत प्रशासन के उद ् देश्य हेतु दूसरे देशों को सौंप दिये जाते हैं। मेरे विचार से जहाँ तक भारत के नागरिकों और अधिदेशित या न्यासित क्षेत्रों के निवासियों के मूलाधिकारों का संबंध है यह वांछनीय है कि उनमें भेदभाव नहीं होना चाहिए।

इसलिए यह वांछनीय है कि यह संशोधन किया जाए ताकि मूलाधिकारों का सिद्धांत इन क्षेत्रों तक भी बढ़ाया जा सके।

ऽ ऽ ऽ ऽ

# » सी.ए.डी., अंक सी.ए.डी., अंक VIIVII, 25 नवम्बर, 1948, पृ. 595-605, 25 नवम्बर, 1948, पृ. 604

ऽ वही, पृ. 607