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महोदय, इस संशोधन को लाने का कारण यह है- इस पर ध्यान दिया जायेगा कि अनुच्छेद 8 में दो अभिव्यक्तियां हैं। अनुच्छेद 8 की उपधारा (1) में वाक्यांश ‘लागू कानून’ आता है जबकि उपधारा (2) में शब्द ‘कोई कानून’ आते हैं। मूल प्रारुप, जैसा इस सदन मं प्रस्तुत किया गया, का उददेश्य उपधारा (3) में शब्द ‘कानून’ की परिभाषा देना था। शब्द ् ‘लागू कानून’ परिभाषित नहीं था। यह संशोधन उस कमी को ठीक करने का प्रयत्न करता है। हमने उपधारा (3) को दो भागों (क) और (ख) में विभक्त कर दिया है। जैसा मूल उपधारा (3) में निहित है। (क) में ‘कानून’ शब्द की परिभाषा समाहित है और (ख) में अभिव्यक्ति ‘लागू कानून’ जो अनुच्छेद 8 की उपधारा (1) में आती है, को परिभाषित करता है। मैं नहीं समझता कि इससे अधिक स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।
ख्ऽ, श्री नज़ीरुद्दीन अहमद ः महोदय, मैं अपना संशोधन प्रस्तावित करने के पूर्व यह बताने की प्रार्थना करता हूँ कि, क्योंकि एक विस्तृत संशोधन माननीय डॉ. अम्बेडकर के द्वारा प्रस्तावित किया गया है, मेरे विचार में प्रस्तुत संशोधन को उस संशोधन पर लागू करने के लिए उपयुक्त ढंग से अनुकूल बना लेना चाहिए। मैं इसका केवल दूसरा भाग प्रस्तावित करना चाहता हूँ।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः सर्वप्रथम, यह पता लगाएं कि वे इसे स्वीकार करते हैं या नहीं।
श्री नज़ीरूद्दीन अहमद ः जब तक मैं मामले पर जिरह नहीं कर लेता, वे स्वीकार नहीं करेंगे। महोदय, मेरे विचार से, यह संशोधन स्वीकार करना ही पड़ेगा।
मैं प्रस्ताव रखने की प्रार्थना करता हूँ -
फ्कि डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन नं. 260 में, एक शब्द फ्भारत के क्षेत्र या इसके किसी हिस्से में कानून की शक्ति लिए हुए रिवाज या लोकाचारय् निकाल दिये जाएं।य्
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः आप उस संशोधन में बिना किसी सूचना के कैसे जोड़ सकते हैं? यह नियम के विरुद्ध है। आप केवल सुझाव दे सकते हैं।
श्री नज़ीरुद्दीन अहमद ः मैने मूल अनुच्छेद में एक संशोधन की पहले ही सूचना दे दी है। डॉ. अम्बेडकर के विचार में, परिणामी परिवर्तन होने चाहिए।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः तब ठीक है।
ऽ ऽ ऽ ऽ
# श्री नज़ीरुद्दीन अहमद ः मुझे व्यवधान पर खुशी है। इससे मेरी कठिनाइयां बिल्कुल भी दूर नहीं हुई हैं। क्या इसे कहने का तात्पर्य यह है कि राज्य रिवाज या लोकाचार का निर्माण करता है? आप को अभी भी कठिनाई है इसका सामना करने में कि राज्य को रिवाज और लोकाचार को शामिल करते हुए कानून बनाने होंगे।
ऽ सी.ए.डी., अंक VII, 26 नवम्बर, 1948, पृ. 641
# सी.ए.डी., अंक VII, 26 नवम्बर, 1948, पृ. 642