56 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय श्री बी.जी. खेर ः बेशक इसका अर्थ है ‘जब भी आवश्यक हो’। कानून में यह हमेशा ‘समझा हुआ’ होता है। मुझे व्यवधान डालने के लिए खेद है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः सम्भवतया वह अपना भाषण जारी रखना आवश्यक नहीं समझेंगे यदि मैं उन्हें इस सच्चाई का हवाला दूँ कि 3(क) में अभिव्यक्ति ‘कानून’ को हवाला कानून 8(1) में दिया गया है।
श्री नज़ीरुद्दीन अहमद ः मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा किए गए समुचित व्यवधान का आभारी हूँ कि शब्दों ‘रिवाज और लोकाचार’ में कानून की शक्ति है और आगे ......
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[#] श्रीमान् उपाध्यक्ष ः क्या हम अनुच्छेद 8 पर चर्चा पुनः शुरू करें? कोई माननीय सदस्य इस पर बोलना चाहता है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बई - जनरल) ः श्रीमान् उपाध्यक्ष, श्रीमान् नज़ीरुद ् दीन का संशोधन कुछ कठिनाई पैदा कर रहा है जिसे दूर करना आवश्यक है। उनके संशोधन का इरादा स्थिति की निरर्थकता को दूर करना था जो प्रारुप के वर्तमान स्वरूप द्वारा पैदा की गयी है। उनके तर्क का, यदि मैं सही समझता हूँ, यह अर्थ है कि कानून की परिभाषा में हमने रिवाज को भी शामिल किया है, और रिवाज को शामिल करने के बाद, हम यह भी बोलते हैं कि राज्य को कोई कानून बनाने का अधिकार नहीं है उनके अनुसार, इसका अर्थ है कि राज्य के पास रिवाज के निर्माण की शक्ति होगी, क्योंकि हमारी परिभाषा के अनुसार कानून में रिवाज शामिल है। मुझे सोचना चाहिए था कि वह रचना सम्भव नहीं थी, क्योंकि इसका सीधा सा कारण है कि अनुच्छेद 8 की उपधारा (3) केवल अनुच्छेद 8 की उपधारा (2) पर ही नहीं बल्कि पूरे अनुच्छेद 8 पर लागू होती है। अतएव, केवल जो एक रचना सम्भव है वह ‘कानून’ को पृथक रूप में पढ़ना है ताकि जहाँ तक अनुच्छेद 8 की उपधारा (1) का संबंध है ‘कानून’ में रिवाज भी शामिल होगा जबकि जहाँ तक उपधारा (2) का संबंध है ‘कानून’ में रिवाज़ शामिल नहीं होगा। मेरे हिसाब से यह उचित पठन होगा और यदि यह इस तरह पढ़ा जाता तो जिस निरर्थकता की स्थिति का मेरे मित्र ने जिक्र किया वह न उठी होती।
लेकिन, मैं यह बिल्कुल समझ सकता हूँ कि एक व्यक्ति जिसे कानून की व्याख्या के नियमों के बारे में सुशिक्षित नहीं किया गया है वह इस तरह की रचना कर सकता है जैसे मेरे मित्र नज़ीरुद ् दीन अहमद ने करने की कोशिश की है और इसलिए इस कठिनाई से बचने के लिए, आपकी अनुमति से, मैं सुझाव दूँगा कि संशोधन जो मैंने अनुच्छेद 8 की उपधारा (3) में किया है, में मुझे शब्दों फ्इस अनुच्छेद फ्मैंय् के बाद अधोलिखित शब्दों को जोड़ने की अनुमति दी जाए। शब्द जो मैं जोड़ना चाहूँगा इस प्रकार है-
# सी.ए.डी., अंक VII, 29 नवम्बर, 1948, पृ. 644-45