अनुच्छेद 9 - Page 74

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(4) एक मतदाता को चुनाव में खड़ा होने का अधिकार होगा और चुनाव का

खर्च राज्य द्वारा वहन किया जाएगा।

(5) प्रत्येक सदस्य लोगों द्वारा चुना जाएगा और यदि उसका कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं

भी है तो भी वह सदस्य तब तक नहीं चुना जाएगा जब तक उसे कुल मतों

के एक-तिहाई मत नहीं मिलें।य्

ख्ऽ, श्री अल्गूराम शास्त्री (संयुक्त प्रांत - जनरल) ः [#] श्रीमान् उपाध्यक्ष, मैं अपने मित्र द्वारा प्रस्तावित संशोधन का विरोध करता हूँ।

ऐसा करने का मेरा पहला कारण यह है की यहाँ उठाये गये विषय से इसका कोई संबंध नहीं है। चुनाव से संबंधित मामलों पर विचार प्रारुप संविधान में किसी अन्य स्थान पर किया गया है जहाँ यह कहा गया है कि किस प्रकार विधायिका निर्मित की जाएगी, विधायिकाओं के सदस्य कौन होंगे, उनके अधिकार क्या होंगे, उनके चुनाव की क्या प्रक्रिया होगी? इस प्रकृति के संशोधन इस प्रकार के विषय से संबंधित अनुच्छेद में ही प्रस्तावित किए जा सकते हैं। यह संशोधन मूलाधिकारों के पूर्णतया अप्रासंगिक है ..... इस संशोधन को तुरंत अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए और इसे कभी स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं इस संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता।

लोकनाथ मिश्रा का प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ।

अनुच्छेद 9

[♦] श्रीमान् उपाध्यक्ष ः संशोधन नम्बर 313 की अनुमति नहीं है क्योंकि यह शाब्दिक है। संशोधन संख्या 314। डॉ. अम्बेडकर।

श्री एच.वी. कामथ ः श्रीमान् उपाध्यक्ष, महोदय, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि क्या यह केवल एक शाब्दिक या अधिक से अधिक औपचारिक संशोधन है जिसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए? यह केवल शब्दों ‘राज्य के राजस्व’ के लिए शब्द ’राज्य कोष’ प्रतिस्थापित करने का प्रयत्न करता है।

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः मैं इस पर ध्यान दूँगा। डॉ. अम्बेडकर, क्या कृपया आप इस पर विचार करेंगे?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ-

फ्कि अनुच्छेद 9 की धारा (1) के दूसरे पैरा में उपधारा (ब) में, शब्दों ‘राज्य के राजस्व’ को शब्द ‘राज्य कोष’ से क्यों प्रतिस्थापित किया जाए। प्रारुप समिति के यह

ऽ # ♦ सी.ए.डी., अंक सी.ए.डी., अंक हिन्दुस्तानी भाषण का अनुवाद। VIIVII, 29 नवम्बर, 1948, पृ. 646, 29 नवम्बर, 1948, पृ. 653-54