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60 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

महसूस करने का कारण कि शब्दों ‘राज्य के राजस्व’ को शब्द ‘राज्य कोष’ से क्यों प्रतिस्थापित किया जाए, आसान है। प्रशासनिक शब्दावली जो भारत में काफी लम्बे समय से अमल में आती रही है हम ‘प्रांत सरकार के राजस्व और केन्द्र सरकार के राजस्व’ बोलने के आदी हो गये हैं। जब हम स्थानीय बोर्डों और जिला बोर्डों की बात करते हैं तो हम सामान्यता ‘स्थानीय कोष’ का प्रयोग करते हैं, न कि राजस्व का। यही शब्दावली पूरे भारत के सभी प्रांतों में अमल में रही है। अब, माननीय सदस्य स्मरण करेंगे कि इस भाग में हम शब्द ‘राज्य’ का प्रयोग केवल केन्द्र सरकार और प्रांत सरकार और भारतीय राज्यों की सरकार को शामिल करने के लिए ही नहीं बल्कि स्थानीय प्राधिकारियों, जैसे कि स्थानीय जिला बोर्ड या स्थानीय तालुका बोर्ड या पत्तन-प्रबंध प्राधिकारियों को शामिल करने के लिए भी कर रहे हैं। जहाँ तक उनका संबंध है, उचित शब्द ‘कोष’ है। इसलिए यह इस सच्चाई के मद्देनजर वांछनीय है कि हम इन मूलाधिकारों को केवल केन्द्र सरकार और प्रांतीय सरकारों के लिए ही बाध्यकर नहीं बना रहे बल्कि स्थानीय जिला बोर्डों तथा स्थानीय तालुका बोर्डों के लिए भी बना रहे हैं और ऐसी व्यापक वाक्य रचना का प्रयोग कर रहे हैं जो केवल केन्द्र सरकार पर ही लागू नहीं होगी बल्कि ऐसे स्थानीय बोर्डों पर लागू होगी जो ‘राज्य’ शब्द की परिभाषा में शामिल हैं। मैं आशा करता हूँ कि मेरे मित्र श्रीमान् कामथ अब समझ जाएंगे कि जिस संशोधन का मैने प्रस्ताव किया है वह केवल शाब्दिक नहीं है, बल्कि इसमें कुछ सार है।

महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ।

ऽ ऽ ऽ ऽ

ख्ऽ, (एक या दो माननीय सदस्य बोलने के लिए उठे)

श्रीमान् उपाध्यक्ष ः यदि मैं माननीय सदस्यों की इच्छायें पूरी कर पाने में असमर्थ होता हूँ तो आप मुझे अवश्य ही माफ कर देंगे। मैं सदन का पूरा सहयोग चाहता हूँ और मैं विशेष तौर पर अभी सहयोग माँगता हूँ। डॉ. अम्बेडकर।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर - महोदय, प्रस्तावित किए गये संशोधनों पर विचार करते हूए, मैं श्रीमान् राउफ द्वारा प्रस्तावित संशोधन सं. 280 को स्वीकार करता हूँ।

श्री श्यामानन्द सहाय (बिहार - जनरल) ः क्या माननीय सदस्य उन संशोधनों के बारे में भी अपने मत नहीं दे सकता जिन्हें प्रस्तावित नहीं किया गया है।

श्री श्यामानन्द सहाय - यह संबंधित सदस्य की गलती नहीं थी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं कुछ नहीं कर सकता। मैं श्रीमान् राउफ के संशोधन में शब्द ‘जन्म स्थान’ जोड़ते हुए इसे स्वीकार करता हूँ। मैं संशोधन नं. 276 में श्रीमान् सुब्रहमण्यम का संशोधन (सूची I में सं. 37) अनुच्छेद 9 की धारा (1) से शब्द ’विशेषकर’ निकालते हुए स्वीकार करता हूँ।

ऽ सी.ए.डी., अंक VII, 29 नवम्बर, 1948, पृ. 660-64