63
बोर्ड या प्रांत सरकार या ग्राम पंचायत द्वारा चलाये जा रहे हैं, किसी का, निस्संदेह, कोई अधिकार नहीं है क्योंकि वह कोई सार्वजनिक स्थल नहीं है जिसके बारे में प्रवेश का कोई दावा कर सके। लेकिन यदि कब्रिस्तान, राज्य कोष की मदद से राज्य द्वारा चलाया जा रहा है तो स्पष्टतया प्रत्येक व्यक्ति को उसमें अपना शरीर दफनाने का अधिकार है।
इसके बाद मेरे मित्र ने मुझसे पूछा कि क्या जलाशयों में तालाब भी शामिल हैं? जवाब स्पष्टतया हाँ में है। एक जलाशय एक तालाब से बड़ा होता है इसलिए यह उसमें आवश्यक रूप से शामिल है।
अन्य प्रश्न जो उन्होंने मुझसे पूछा, वह था कि क्या नदियों, नहरें, धारायें, और जल संशाधन अछूतों के लिए खुले होंगे। निस्संदेह कुआँ, नदी, धारायें और नहरें अनुच्छेद 9 के तहत आयेंगे लेकिन ये अनुच्छेद 11 के प्रावधानों द्वारा निश्चित रूप से शामिल कर लिए जायेंगे जो अछूतों के दूसरे जातियों के सदस्यों के साथ समान व्यवहार करने में उनके अधिकारों में हस्तक्षेप को अपराध मानता है। इसलिए मेरे मित्र नागप्पा के लिए मेरा जवाब यह है कि उन्हें नदियों, धाराओं, नहरों आदि के प्रयोग के संबंध में किसी प्रकार का भय पालने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि संसद के लिए अनुच्छेद 1 के तहत कानून बनाकर ऐसी असंगति यदि है, को दूर करना पूर्णतया संभव है।
श्री एस. नागप्पा ः पानी के रास्तों के बारे में?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं इस चरण में इस अनुच्छेद में कुछ नहीं जोड़ सकता। लेकिन मुझे कोई संदेह नहीं है कि नदियों और नहरों के संबंध में कोई भी आवश्यक और पर्याप्त कार्यवाही अनुच्छेद 11 के तहत की जा सकती है।
श्री आर.के. सिधवा ः ‘सार्वजनिक’ शब्द की व्याख्या के बारे में?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मेरे मित्र श्रीमान् सिधवा ने भारतीय दंड सहिता मे से ‘सार्वजनिक’ शब्द के बारे में एक परिभाषा पढ़ी थी और कहा था कि उसमें शब्द ‘सार्वजनिक’ बहुत सीमित अर्थ मे प्रयुक्त हुआ है जैसे कि यह एक वर्ग के लिए हो। मैं उनका ध्यान इस सच्चाई की ओर आकृष्ट करना चाहूँगा कि यहाँ शब्द ‘सार्वजनिक’ विशेष अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। एक स्थान सार्वजनिक शरण का स्थान है, यदि यह पूर्णतया या अंशतया राज्य कोष द्वारा चलाया जा रहा है। इसका भारतीय दंड संहिता में दी हुई परिभाषा से कुछ भी संबंध नहीं है।
श्री महावीर त्यागी (संयुक्त प्रांत - जनरल) ः क्या मैं जान सकता हूँ कि उन संशोधनों का क्या होगा जिन्हें आपने शाब्दिक घोषित कर दिया है? उनमें से कुछ के बारे में, मुझे डर है, कि उनका संबंधित अनुच्छेद या धारा के अर्थ में वास्तव में सारपूर्ण परिवर्तन करने का उद ् देश्य है।
श्रीमान् उपाध्यक्ष ः इस मामले में अकेला मैं ही जज हूँ। आपने मुझे विवेक की शक्ति प्रदान कर रखी है और मैं इसका अपने तरीके से प्रयोग करने का प्रस्ताव करता हूँ।