अनुच्छेद 13 - Page 96

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‘प्रचलित कानून’ में मेरा संशोधन और फ्उचितय् शब्द का जुड़ना मेरे विचार में उन कमियों को दूर कर देंगे जिनकी ओर माननीय सदस्यों ने इस अनुच्छेद पर दिए गए अपने भाषणों में इशारा किया था, और मेरे विचास से मेरे मित्र प्रो. शिब्बनलाल सक्सेना और श्रीमान् टी.टी. कृष्णमाचारी तथा श्रीमान् अल्गूराय शास्त्री द्वारा दिए गए भाषण सदन को विश्वास दिला देंगे और यह अनुच्छेद अपने वर्तमान रूप में इन्हीं संशोधनों के साथ बिना कठिनाई के सदन द्वारा स्वीकार कर लिया जाएगा और इसलिए मेरे मित्रों ने अनुच्छेद के समर्थन में जो कहा है उसमें मैं कुछ भी नहीं जोड़ना चाहता। वास्तव में, मैं इस अनुच्छेद के समर्थन में उनके द्वारा अपने भाषणों में दिए गए तर्कों में सुधार करने में बड़ी कठिनाई पाता हूँ।

इसलिए मैं दूसरी बातें लूँगा। उनमें से अधिकांश मेरे मित्र, श्रीमान् एम. अनन्थाशयमन आयंगर ने विचार कर लिया है और यदि, महोदय, आपने कहा न होता तो मैं कहता कि उनका भाषण मेरा भाषण समझा जा सकता है, क्योंकि उन्होंने उन सभी बातों पर विचार किया है, जो नोट की थीं।

अब, जिस एक बात को मैने ध्यान में रखा था और जिसके बारे में मैंने अपने उत्तर के दौरान कुछ कहने के लिए सोचा था वह मेरे मित्र प्रो. के.टी. शाह द्वारा कही गई थीं कि मूलाधिकार प्रेस की आजादी का जिक्र नहीं करते। मेरी समझ में, मेरे मित्र श्रीमान् अनन्थाशयमन आयंगर दिया गया उत्तर पूर्ण है। प्रेस मात्र एक व्यक्ति या नागरिक द्वारा अपनी बात करने का एक तरीका है। प्रेस के पास कोई ऐसे विशेष अधिकार नहीं हैं जो नागरिक को नहीं दिये गये हैं या जो उसके द्वारा व्यक्तिगत क्षमता के तौर पर प्रयोग नहीं किए जाते हैं। एक प्रेस का सम्पादक या प्रबंधक सभी नागरिक हैं और इसलिए जब वे समाचार पत्रों में लिखना चुनते हैं तो वे केवल अपना अभिव्यक्ति का अधिकार प्रयोग कर रहे होते हैं, और इसलिए मेरे विचार से प्रेस की आजादी का कोई विशेष उल्लेख करना कतई आवश्यक नहीं है।

अब, हथियार रखने के प्रश्न पर, जिसके बारे में मेरे मित्र श्रीमान् कामथ इतना अधिक उत्तेजित थे, मेरे विचार से जो दृष्टिकोण हमने अपनाया है वह बिल्कुल स्पष्ट है। यह बिल्कुल सच है और प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि कांग्रेस पार्टी आन्दोलन कर रही थी कि हथियार रखने का अधिकार होना चाहिए। इससे कोई इंकार नहीं कर सकता। यह इतिहास है। साथ ही, मेरे विचार से, सदन को यह सच्चाई नहीं भूलनी चाहिए कि वे परिस्थितियां अब नहीं हैं जब ऐसे प्रस्ताव कांग्रेस द्वारा पारित किए गए थे।

श्री एच. वी. कामथ ः यह एक बहुत ही सुविधाजनक तर्क है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः यह इसलिए है क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को हथियार रखने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था, शांति और व्यवस्था के आधार पर नहीं बल्कि इस आधार पर कि पराधीन लोगों को एक विदेशी सरकार के विरुद्ध हथियार रखने का अधिकार नहीं होना चाहिए जिससे कि सरकार का तख्ता पलटने