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82 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के लिए वे आपस में संगठित न हो सकें और परिणामस्वरूप वे मूल विचार जिनके आधार पर ये प्रस्ताव किए गये थे, मेरे विचार में, समाप्त हो चुके हैं। वर्तमान परिस्थितियों में, मैं व्यक्तिगत रूप से यह कल्पना नहीं कर सकता कि राज्य के लिए अपना प्रशासन चलाना कैसे संभव होगा यदि प्रत्येक व्यक्ति को राज्य की ओर से बिना किसी रुकावट या बाधा के बाजार से हमला करने के सभी प्रकार के हथियार खरीदने का अधिकार मौजूद हो।

श्री एच. वी. कामथ ः स्पष्टीकरण की बात पर, महोदय, इस अधिकार पर रोक लगाने हेतु यह परन्तु कहें।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः परन्तुक से क्या होता है? परन्तुक क्या कहता है- परन्तुक केवल विनियमित कर सकता है और शब्द ‘नियमन’ की न्यायिक व्याख्या शर्तों को निर्धारित करने के रूप मे की गई है लेकिन शर्तें ऐसी कभी नहीं हो सकतीं कि वे नागरिकों के हथियार रखने के अधिकार को पूर्णतया समाप्त कर दें। इसलिए नियमन स्वयं एक नागरिक को हथियार रखने के अधिकार को प्रयोग करने से नहीं रोकेगा जो इस अधिकार का प्रयोग करना चाहता है। मैं सभी नागरिकों को बिना उनमें भेद करते हुए इस प्रकार के मूल अधिकार दिये जाने की नीति का ही विरोध करता हूँ। उदाहरण के लिए, यदि श्रीमान् कामथ का सिद्धांत स्वीकार कर लिया जाता, कि प्रत्येक नागरिक को हथियार रखने का अधिकार होना चाहिए तो उन हजारों-हजार नागरिकों को हथियार रखने की छूट मिल जाएगी जो आज अपराधी समुदाय के नाम से जाने जाते हैं। इस प्रकार के उन सभी लोगों को जो आदतन अपराधी हैं हथियार रखने के अधिकार का दावा करने की छूट मिल जाएगी। आप प्रतिबंध के तहत यह नहीं कह सकते कि अमुक व्यक्ति हथियार रखने का अधिकारी नहीं होगा क्योंकि वह एक अमुक वर्ग से संबंधित है।

श्री एच. वी. कामथ ः यदि डॉ. अम्बेडकर परन्तुक को पूरी तरह और स्पष्ट रूप से समझते हैं तो वह देखेंगे कि संशोधन का इस तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं अब नहीं मान सकता। मेरे पास अब अधिक समय नहीं बचा है। मैं उस रूख को स्पष्ट कर रहा हूँ जो प्रारुप समिति द्वारा अपनाया गया है। बात यह है कि इस अविवेकी अधिकार की अनुमति सम्भव नहीं है। दूसरी तरफ, मेरा कहना है, जहाँ तक हथियार रखने का संबंध है, हमें जिसका आग्रह करना चाहिए वह व्यक्ति का हथियार रखने का अधिकार नहीं बल्कि वह उसका हथियार रखने का कर्त्तव्य है। (एक माननीय सदस्य - सुनो सुनो।) वास्तव में हमें यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि जब आपातकालीन स्थिति पैदा होती है, जब युद्ध छिड़ जाता है, जब बगावत हो जाती है, जब राज्य की सुरक्षा और स्थिरता को खतरा पैदा हो जाता है तब राज्य अपने प्रत्येक नागरिक से राज्य की सुरक्षा में हथियार उठाने का आहवान करने का अधिकारी होगा। यही वह सिद्धांत है जिसके लिए हमें पहल करनी चाहिए और इस स्थिति को हमने अनुच्छेद 17 के प्रतिबंध द्वारा पूर्णतया सुरक्षित कर दिया है।