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84 बाबा साहेब डा. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हम सभी को यह अवश्य याद रखना चाहिए - इसमें मुस्लिम समुदाय के सदस्य भी शामिल हैं, यद ् यपि प्रत्येक व्यक्ति उनकी भावनाओं की कद्र करता है, - कि सम्प्रभुता सदैव सीमित होती है, चाहे आप दावे के साथ ही क्यों न कहें कि यह असीमित होती है, क्योंकि सम्प्रभुता की इस शक्ति के प्रयोग में राज्य को विभिन्न समुदायों की भावनाओं के साथ सामंजस्य बिठाना चाहिए। कोई सरकार इस शक्ति का प्रयोग इस ढंग से नहीं कर सकती जिससे कि मुसलमान विद्रोह करने के लिए भड़क उठें। मेरे विचार से वह एक पागल सरकार ही होगी यदि वह ऐसा करती है। लेकिन यह ऐसा मामला है जो शक्ति के प्रयोग से संबंधित है न कि स्वयं शक्ति से।

अब, महोदय, मेरे मित्र श्रीमान् जसपाल सिंह ने आदिवासियों के बारे में मुझसे कुछ प्रश्न पूछे हैं। मेरे विचार से यह प्रश्न उचित तरीके से उस समय उठाया जा सकता था जब हम पांचवीं और छठवीं अनुसूचियों पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन उन्होंने अब इन प्रश्नों को उठा दिया है और जैसा उन्होंने मुझसे विशेषकर उन कठिनाइयों के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है जो उन्होंने पायीं, मैं मामले पर अब विचार कर रहा हूँ। सदन उस दृष्टिकोण के बारे में अनुभव करेगा जो हमने प्रारुप संविधान में आदिवासियों के बारे में निर्धारित किया है। हमारे पास दो प्रकार के क्षेत्र हैं - अनुसूचित क्षेत्र और जनजातीय क्षेत्र। जनजातीय क्षेत्र ऐसे क्षेत्र हैं जो केवल असम प्रान्त से संबंधित हैं जबकि अनुसूचित क्षेत्र वे क्षेत्र हैं जो असम के अलावा अन्य प्रांतों में छितरे पड़े हैं। उनका वास्तव में भिन्न नाम है जिनके लिए हमने भारतीय सरकार अधिनियम में ‘अंशतः बहिष्कृत क्षेत्र’ शब्दों का प्रयोग किया है। इससे अधिक कुछ नहीं है। अब, अनुसूचित जनजातियां दोनों ही क्षेत्रों मे निवास करती हैं, अर्थात ् अनुसूचित क्षेत्रों में भी तथा जनजातीय क्षेत्रों में भी, और अनुसूचित क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों की स्थिति तथा जनजाती क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों की स्थिति के बीच यह अन्तर है - अनुसूचित क्षेत्रों की अनुसूचित जनजातियां पाँचवीं अनुसूची के पैरा 5 मेंं निहित प्रावधानों द्वारा नियंत्रित होती हैं। इस अनुसूची के अनुसार, संसद द्वारा या स्थानीय विधायिका द्वारा पारित साधारण कानून स्वतः ही तब तक लागू होता है जब तक राज्यपाल यह घोषित नहीं करता कि यह कानून या इसका कोई भाग लागू नहीं होगा। जनजातीय क्षेत्रों की अनुसूचित जनजातियों के मामले में, स्थिति थोड़ी भिन्न है। इन क्षेत्रों में संसद द्वारा या असम की स्थानीय विधायिका द्वारा बनाया गया कानून तब तक लागू नहीं होगा जब तक कि राज्यपाल जनजातीय क्षेत्र तक इस कानून की सीमा नहीं बढ़ाता। पहली स्थिति में यह तब तक लागू होता है जब तक यह बहिष्कृत नहीं कर दिया जाता और दूसरी स्थिति में यह तब तक लागू नहीं होता जब तक कि यह बढ़ा नहीं दिया जाता। यह स्थिति है।

अब, अनुसूचित जनजातियों के प्रश्न पर आते हुए, और मैंने ‘अनुसूचित’ शब्द को ‘आदिवासी’ शब्द के लिए क्यों प्रतिस्थापित किया, इसका स्पष्टीकरण यह है। जैसा मैने कहा, शब्द अनुसूचित जनजाति का निश्चित अर्थ है क्योंकि यह जनजातियों का विवरण