अनुच्छेद 145 - Page 102

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श्री एच.वी. कामतः अपने संशोधन के संदर्भ में यह जानना चाहता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर ने जो पहले अपने विचार प्रकट किए थे उस पर वह कायम हैं?

माननीय सभापतिः मैं नहीं समझता कि इस प्रकार के वाद-विवाद करने की अनुमति दी जा सकती है। अब मैं संशोधनों को लूँगा।

श्री ताहिर और मोहम्मद इस्माइल द्वारा प्रस्तुत दो संशोधन जिनकी संख्या 2174 और 2175 है, जो कि इस अनुच्छेद 144, खण्ड (1) से संबंधित हैं।

यदि डॉ. अम्बेडकर के संशोधन संख्या 2165 को बनाए रखा जाता है तो संभवतः ये संशोधन स्वतः ही समाप्त हो जाएंगे। इसलिए, मैं डॉ. अम्बेडकर के संशोधन पर मत लूँगा।

¹पूर्व में उल्लिखित डॉ. अम्बेडकर के सभी संशोधन स्वीकृत हुए, अन्य शेष संशोधन अस्वीकृत हुए। अनुच्छेद 144, यथासंशोधन रूप में संविधान में जोड़ा गया।ह्

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अनुच्छेद 145

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे विचार से जो बहस हो चुकी है उसमें और कुछ जोड़े जाने की जरूरत नहीं है। मुझे सिर्फ इतना कहना हैः मैं श्री नजरुद्दीन अहमद के संशोधन संख्या 2210 को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।

* माननीय सभापतिः फिर मैं संशोधन संख्या 2210 जिसमें 2211 को भी शामिल किया गया है, को मतदान के लिए रखता हूँ।

¹श्री नजरुद्दीन अहमद के निम्नलिखित संशोधन को डॉ. अम्बेडकर और सभा द्वारा स्वीकार किया गया।ह्

फ्अनुच्छेद 145 के खण्ड (2) और (4) के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएः

(3) महाधिवक्ता, राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत पद धारण करेगा और ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो राज्यपाल अवधारित करे।य्

¹अनुच्छेद 145, यथासंशोधन रूप में संविधान में जोड़ा गया।ह्

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* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 1 जून, 1949, पृ. 528

+ पूर्वोक्त, 2 जून, 1949, पृष्ठ 532