86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रशासन माना जा सके। इसलिए, इन दो कर्त्तव्यों के संबंध में जो राज्यपाल के लिए निर्धारित हैं कि प्रशासन को पूरी तरह से पवित्र बनाकर रखा जाए और उसमें भ्रष्टाचार द्वारा कोई भी ऐसा प्रस्ताव नहीं तैयार किया जाए जो लोगों की इच्छा के विपरीत हो और इसलिए वह वैसी स्थिति में सरकार को उसके बारे में परामर्श दे सकता है, उसे चेता सकता है तथा उस पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकता है - मैं सभा से पूछता हूँ कि यदि राज्यपाल को कतिपय सूचना नहीं दी जाएगी तो फिर वह किस प्रकार से अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन कर पाएगा? मेरा यह कहना है कि वह अपने संवैधानिक कृत्यों का निर्वहन तब तक नहीं कर सकता जब तक कि वह सूचना प्राप्त कर पाने की स्थिति में नहीं हो। उदाहरण के लिए मंत्रिमंडल द्वारा कोई संकल्प पारित किया जाता है - और मुझे मालूम है कि ऐसा कई मामलों में, कई प्रान्तों में आज हुआ है - कोई राज्यपाल को भेजे जाने की जरूरत नहीं समझी गई है तो फिर राज्यपाल अपने कृत्यों का निर्वहन किस प्रकार से कर पाएगा? हम जो राज्यपाल को सूचना प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करना चाहते हैं उसका मकसद राज्यपाल को सूचना प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करना चाहते हैं उसका मकसद राज्यपाल को अच्छे और साफ-सुथरा प्रशासन चलाने के संबंध में अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम बनाता है। यदि मैं ऐसा कहूँ बल्कि मैं सभा को बताना चाहता हूँ कि केन्द्र में इस प्रकार से कार्य किए जाते हैं। जहां तक मुझे जानकारी है कि कैबिनेट के पत्र गवर्नर जनरल को भेजे जाते हैं। उसी प्रकार से लोक महत्त्व के मामलों से संबंधित महत्त्वपूर्ण विषय पर प्रत्येक मंत्रालय में लिए गए निर्णयों के बारे में प्रत्येक मंत्रालय द्वारा साप्ताहिक सारांश तैयार किए जाते हैं। ये सारांश मंत्रिमंडल में रखे जाते हैं और ये सारांश गवर्नर जनरल को भी भेजे जाते हैं। उदाहरण के लिए यदि गवर्नर जनरल विभागों द्वारा भेजे गए साप्ताहिक सारांशों को देखने पर यह पाता है कि कोई मंत्री बिना मंत्रिमंडल का संदर्भ लिए ही किसी खास विषय पर कोई निर्णय ले लेता है जो कि उसके विचार में अच्छा नहीं है तो क्या इसमें कुछ भी गलत होगा। यदि गवर्नर जनरल को यह कहने की शक्ति प्रदान की जाती है कि किसी मंत्री विशेष द्वारा अन्य मंत्रियों से परामर्श लिए बगैर कोई खास निर्णय ले लिए जाने की स्थिति में, उस पर कैबिनेट द्वारा पुनर्विचार किया जाना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि ऐसा उपबंध किए जाने से कोई नुकसान हो सकता है। मुझे नहीं लगता कि इससे सरकार के प्रशासनिक कार्य में किसी प्रकार का हस्तक्षेप पैदा होगा। इसलिए, मेरा यह कहना है कि इस अनुच्छेद के विरुद्ध जो आलोचनाएं सामने आई हैं, वे इस अनुच्छेद की गलत व्याख्या करने या फिर लोगों के मन में व्याप्त कतिपय गलत धारणा के कारण की गई हैं कि यह अनुच्छेद राज्यपाल के प्रशासन में शक्ति प्रदान करता है। ऐसी कोई भी मंशा नहीं है और मुझे पूरा विश्वास है कि अनुच्छेद 147 में जिस भाषा का प्रयोग किया गया है उसके परिणामस्वरूप ऐसी कोई स्थिति सामने आएगी। इस अनुच्छेद में सिर्फ इतना किया गया है कि राज्यपाल अपने