अनुच्छेद 151 - Page 106

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दायित्व का निर्वहन कर सके इसके लिए उसे समर्थ बनाया गया है। मैं नहीं समझता कि उसके लिए कोई कृत्य का प्रावधान किया गया है लेकिन उसके कुछ कर्त्तव्य हैं जिसे प्रत्येक अच्छे राज्यपाल को पूरा करना चाहिए। (लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की)।

श्री एच.वी. कामतः मैं डॉ. अम्बेडकर से कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ।

माननीय सभापतिः अब प्रश्न पूछने का क्या फायदा? आपको मौका दिया गया था।

श्री एच.वी. कामतः डॉ. अम्बेडकर ने कहा था कि मैं उनके भाषण के बाद प्रश्न पूछ सकता हूँ।

माननीय सभापतिः मैं चर्चा के अंत में प्रश्न पूछने की इस प्रथा को पसंद नहीं करता। सभी प्रश्नों का उत्तर दे दिया गया है। अब मैं अनुच्छेद पर मत लूँगा क्योंकि इसमें कोई संशोधन नहीं है।

माननीय सभापतिः प्रस्ताव हैः कि अनुच्छे 147 संविधान का भाग बने।

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। अनुच्छेद 147 संविधान में जोड़ा गया।

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अनुच्छेद 151

* माननीय सभापतिः 2308 - डॉ. अम्बेडकर।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय मैं प्रस्ताव करता हूँः

कि अनुच्छेद 151 के खण्ड 2 में ‘तीसरे वर्ष’ शब्दों के स्थान पर ‘दूसरे वर्ष’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएं।

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# माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अनुच्छेद पारित किया जा चुका है कि इसमें दूसरी सभा होगी। यह अनुच्छेद केवल इस बात का उल्लेख करता है कि सदस्यगण किस प्रकार से स्वयं को पुनर्निर्वाचित कराएंगे।

प्रो. शिब्बन लाल सक्सेनाः हमें यह निर्णय करना है कि उस विशेष परिषद् का कार्यकाल 9 वर्षों का होना चाहिए या 6 वर्षों का, और यह परिषद् की संरचना पर निर्भर करेगा। उसकी संरचना से उस अवधि का निर्धारण होगा जिसके अंत में एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 2 जून, 1948, पृ. 548

# वही, पृष्ठ 549-50