अनुच्छेद 151 - Page 107

88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय सभापतिः यह परिषद् की संरचना पर निर्भर नहीं करता। सभा का कार्यकाल जितना भी हो, उसकी संरचना हमने जो अनुच्छेद 150 के संबंध में निर्णय लिया है, उसके अनुरूप होगी।

प्रो. शिब्बन लाल सक्सेनाः ठीक है महोदय। मैं आपके विनिर्णय का सम्मान करता हूँ...

फिर यह कहा गया है कि परिषद् के एक तिहाई सदस्य प्रत्येक तीसरे वर्ष सेवानिवृत्त होंगे। मुझे खुशी है कि डॉ. अम्बेडकर ने यह प्रस्ताव किया है कि वह अवधि तीन वर्षों के स्थान पर दो वर्षों की होगी। इससे परिषद् का काल 6 वर्षों का ही रहेगा जो कि लगभग इस सभा के कार्यकाल के बराबर ही है। इससे परिषद में अधिक नवीनता सुनिश्चित हो सकेगी। इसलिए मैं डॉ. अम्बेडकर के संशोधन का समर्थन करता हूँ।

माननीय सभापतिः डॉ. अम्बेडकर, क्या आप कुछ कहना चाहते हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं श्री गुप्ते का संशोधन स्वीकार करता हूँ।

माननीय सभापतिः अब मैं श्री गुप्ते के संशोधन, जिसे डॉ. अम्बेडकर स्वीकार कर चुके हैं, पर मत लूंगा। अब यह मूल संशोधन बन गया है।

प्रस्ताव हैः

फ्संशोधन की सूची के संशोधन संख्या 2304 के संदर्भ में अनुच्छेद 151 के खण्ड (1) के बाद निम्नलिखित परंतुक अन्तःस्थापित किया जाएंः

परंतु उक्त अवधि का, जब आपात स्थिति की उद्घोषणा प्रवर्तन में है, तब संसद विधि द्वारा ऐसी अवधि के लिए बढ़ा सकेगा, जो एक बार में एक वर्ष से अधिक नहीं होगी और उद्घोषणा के प्रवर्तन में न रह जाने के पश्चात् किसी भी स्थिति में उसका विस्तार छह मास की अवधि से अधिक नहीं होगा। (प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।)

माननीय सभापतिः श्री बृजेश्वर प्रसाद का संशोधन। संशोधन, सभा की अनुमति से वापस लिया गया।

माननीय सभापतिः फिर मैं डॉ. अम्बेडकर के संशोधन संख्या 2308 को लेता हूँ।

¹पहले से ही उल्लिखितह्

संशोधन स्वीकृत हुआ।

अनुच्छेद 151 यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया।

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