अनुच्छेद 153 - Page 109

90 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

महोदय, सिर्फ एक मुद्दा है जिसके बारे में मुझे विशेष उल्लेख करना चाहिए। उप-खण्ड (ग) कतिपय रूप में अनुच्छेद 290 और 291 से संबंधित है, जो कि चुनावी मामलों से जुड़े हैं। हमने उन अनुच्छेदों को पारित नहीं किया है।

यदि अनुच्छेद 290 और 291 के बारे में निर्णय लेने के दोरान सभा इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि खण्ड (ग) में अन्तर्विष्ट उपबंध संसद द्वारा बनाए गए कानून के द्वारा निर्धारित होने चाहिए तो मैं प्रारूप समिति के लिए यह अधिकार सुरक्षित रखना चाहूँगा कि वह उप-खण्ड (ग) के अन्तिम भाग पर पुनर्विचार करे। उसके विषयाधीन मेरे विचार से अनुच्छेद को, यथासंशोधित रूप में पारित किया जाना चाहिए।

¹अनुच्छेद 152 यथासंशोधित रूप में संविधान में जोड़ा गया।ह्

* * * * *

अनुच्छेद 153

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्कि अनुच्छेद 153 के खण्ड (3) का लोप किया जाए।य्

यह खण्ड संवैधानिक राज्यपाल के लिए बनी योजना से स्पष्टतः असंगत है।

* * * * *

# श्री गोपाल नारायण (संयुक्त प्रांतः जनरल)ः सभापति महोदय, इस अनुच्छेद पर बोलने से पहले मैं एक शिकायत दर्ज कराना चाहता हूँ और आपसे उस शिकायत को दूर करने की मांग करता हूँ। मैं उन लोगों में से हूँ जिन्होंने इस सभा की सारी बैठकों में शिरकत की है और शुरू से अन्त तक बैठे रहे हैं। लेकिन अब मेरा धैर्य जवाब दे चुका है। मैं यह पाता हूँ कि इस सभा के कुछ माननीय सदस्यों ने सभी प्रकार की बहसों पर अपना एकाधिकार जमा रखा है, जिन्हें प्रत्येक अनुच्छेद, प्रत्येक संशोधन और प्रत्येक संशोधन के संशोधन पर भी बोलना ही बोलना है। महोदय, मैं जानता हूँ कि आपकी अपनी सीमाएं हैं और नियमों के तहत आप उन लोगों को ऐसा करने से नहीं रोक सकते, यद्यपि आपके चेहरे को देखकर मुझे लगता है कि आप भी कभी-कभी इन बातों से बोरियत महसूस करने लगते हैं। लेकिन आप उन लोगों को रोक नहीं सकते। महोदय, आपको मेरा यह सुझाव है कि कुछ सदस्यों पर कुछ समय-सीमा की पाबंदी लगाई जा सकती है। एक सदस्य को दो या तीन मिनट से अधिक समय तक बोलने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। जहाँ तक इस अनुच्छेद का संबंध है, इस पर भी पन्द्रह मिनट

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 2 जून, 1949, पृ. 555

# वही, पृष्ठ 557